तृणमूल कांग्रेस को एक और झटका, मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मिलना हुआ मुश्किल
Published by : Ashish Jha Updated At : 03 Jun 2026 8:46 AM
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee on Wednesday started her two-day sit-in demonstration in Kolkata, India, on March 29, 2023, to protest the BJP-led Union Government's alleged discriminatory attitude against the state. Banerjee, accompanied by senior party leaders Firhad Hakim, Aroop Biswas, Subrata Bakshi and Sovandeb Chattopadhyay, reached the venue in front of Dr B R Ambedkar's statue on the Red Road around noon and started her protest against the Centre's alleged stoppage of funds to the state for MGNREGA and other schemes of the housing and road departments. (Photo by Debajyoti Chakraborty/NurPhoto via Getty Images)
Bengal News: मंत्री तापस राय ने कहा- चूंकि नकली हस्ताक्षरों के आरोप सामने आये हैं. इस वजह से हो सकता है कि तृणमूल के पत्र को स्वीकार न करने के निर्देश जारी किये गये हों. इससे ज्यादा उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार किया.
मुख्य बातें
कोलकाता से शिव कुमार की रिपोर्ट
Bengal News: कोलकाता. तृणमूल नेतृत्व को भी अब यह एहसास हो रहा है कि पार्टी के भीतर फूट पड़ने लगी है. नतीजतन, ममता बनर्जी की पार्टी अब अपने अस्तित्व को बचाने के लड़ाई लड़ रही है, ताकि वह विधानसभा के भीतर मुख्य विपक्षी दल की भमिका में रहे. इसे ध्यान में रखते हुए तृणमूल के दो विधायक कुणाल घोष और असीमा पात्रा मंगलवार को एक नयी चिट्ठी लेकर विधानसभा पहुंचे. स्पीकर रथींद्र बोस की गैर मौजूदगी में तृणमूल के इन दोनों विधायकों ने चिट्ठी उनके सेक्रेटरी को सौंपने की कोशिश की. कुणाल का आरोप है कि स्पीकर के सेक्रेटरी ने उस चिट्ठी को लेने से मना कर दिया. खबर है कि सेक्रेटरी ने उन्हें बताया कि अब वह किसी भी तरह का कोई पत्र स्वीकार नहीं करेंगे. कुणाल ने संवाददाताओं को बताया- स्पीकर हमसे मिलना तो दूर, हमारी चिट्ठी लेने से भी मना कर रहे हैं. क्या ऐसी स्थिति की कल्पना भी की जा सकती है?
सेक्रेटरी को मिले थे साफ निर्देश
दरअसल, सोमवार को तृणमूल पार्टी की ओर से स्पीकर को एक चिट्ठी सौंपी गयी थी, जिसे सेक्रेटरी ने विधिवत स्वीकार कर लिया था. आरोप है कि उस चिट्ठी को स्वीकार करने के तुरंत बाद स्पीकर के सेक्रेटरी को साफ निर्देश मिले कि उन्हें विपक्षी दल से किसी भी तरह का कोई और पत्र स्वीकार करने की अनुमति नहीं है. इसी वजह से सेक्रेटरी ने यह नयी चिट्ठी लेने से मना कर दिया. ऐसे में विधानसभा से बाहर निकलने पर कुणाल घोष ने साफ तौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्पीकर और विधानसभा सचिवालय ने स्पीकर के सेक्रेटरी को किसी भी तरह की चिट्ठी स्वीकार ना करने का निर्देश दिया गया है. कुणाल अपनी चिट्ठी स्पीकर के सेक्रेटरी की मेज पर ही रख कर चले आये हैं. इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गयी है.
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तृणमूल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
तृणमूल सूत्रों के अनुसार, सोमवार को पार्टी द्वारा स्पीकर को एक पत्र सौंपा गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया गया है. पत्र में विपक्ष के नेता के चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हवाले से लिखा गया है कि विपक्ष के नेता के रूप में कौन काम करेगा, इस बारे में फैसला सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का होता है, न कि किसी एक विधायक का. नतीजतन, अभिषेक बनर्जी द्वारा सौंपा गया वह पत्र, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित किया गया है, वैध माना जाये. अपने पत्र में तृणमूल कांग्रेस ने जोर देकर कहा है कि अतीत में इसी विधानसभा के भीतर स्पीकर ने हमेशा उस व्यक्ति को ही विपक्ष के नेता के रूप में मंजूरी दी है, जिसे पार्टी ने चुना था.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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