बंगाल के कस्बा में सीपीएम को झटका, शाकिब समेत कई नेता टीएमसी में शामिल

Author Ashish Jha
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सदस्यता लेते शाकिब

Bengal Election: बंगाल के कस्बा में सीपीएम में फूट पड़ने के बाद तृणमूल की स्थिति और मजबूत हो गयी है. युवा नेताओं का एक समूह प्रतीक-उर के रास्ते पर चलते हुए तृणमूल में शामिल हो गया है. हालांकि, इस अचानक फैसले का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है.

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Bengal Election: कोलकाता. वाम दल को कस्बा में जोरदार झटका लगा है. वाम दल के युवा नेता शाकिब और उनके समर्थकों ने तृणमूल का झंडा थाम लिया है. इस मौके पर कस्बा विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल नेता जावेद अहमद खान और तृणमूल प्रवक्ता जयप्रकाश मजूमदार उपस्थित थे. निवर्तमान राज्य मंत्री जावेद खान कस्बा से तृणमूल के टिकट पर फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि वामपंथी दल ने दीपू दास को उम्मीदवार बनाया है. उनकी मौजूदगी में शाकिब और उनके समर्थकों ने जावेद और जयप्रकाश से तृणमूल का झंडा थाम लिया. अब तक शाकिब वामपंथी उम्मीदवार की सारी चुनावी जिम्मेदारियां संभाल रहे थे.

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प्रतीक-उर-रहमान की नाराजगी पड़ी भारी

इस राजनीतिक बदलाव के पीछे राजनीतिक गलियारों में सीपीएम के युवा नेता प्रतीक-उर-रहमान की नाराजगी की चर्चा हो रही है. पार्टी के प्रति नाराजगी जताते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के हाथों से तृणमूल का झंडा थाम लिया था. ‘इंकिलाब जिंदाबाद’ की जगह अब वे ‘मातृभूमि की विजय’ का नारा लगा रहे हैं. अब वामपंथी खेमे के कुछ युवा नेताओं ने प्रतीक-उर-रहमान का ही अनुसरण किया है. चुनाव से ठीक पहले वे सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. हालांकि, इस पर वामपंथियों की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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एक हजार युवा तृणमूल में शामिल

नव वर्ष के दिन तृणमूल ने कस्बा के तालबागान में एक बैठक आयोजित की. उस बैठक से लगभग 1,000 युवा कार्यकर्ताओं ने लाल झंडा छोड़कर तृणमूल का झंडा थाम लिया. 2021 में, कस्बा समेत तीन स्थानीय समितियों के सदस्य, वाम मोर्चा के अल्पसंख्यक विंग के सक्रिय कार्यकर्ता और डीवाईएफआई के स्थानीय सचिव शाकिब अख्तर ने कोलकाता नगर निगम चुनाव लड़ा था. उस समय वे उस क्षेत्र के सबसे युवा उम्मीदवार थे। शाकिब ने विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी बदलकर तृणमूल में शामिल हो गए. परिणामस्वरूप, यह कहना गलत नहीं होगा कि कस्बा क्षेत्र में वाम खेमे में एक बार फिर फूट पड़ गई है.

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