बंगाल विधानसभा चुनाव : टीएमसी, बीजेपी के खिलाफ सभी ताकतों को एकजुट करना चाहती है सीपीएम

Updated at : 05 Feb 2026 9:55 PM (IST)
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Md Salim on West Bengal Election 2026

सीपीएम के बंगाल राज्य सचिव मो सलीम.

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सभी दल अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में जुट गयीं हैं. पिछली बार यानी 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और फुरफुरा शरीफ के मौलाना की अगुवाई वाली पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली सीपीएम चाहती है कि सभी दल मिलकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को हराने के लिए चुनाव लड़ें.

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कांग्रेस पार्टी के अकेले बंगाल चुनाव लड़ने की घोषणा के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने कहा है कि वह पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ सभी ताकतों को एकजुट करना चाहती है. माकपा के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि उन्होंने अलग-अलग दलों के साथ इसके लिए बातचीत शुरू कर दी है.

टीएमसी और बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ें सभी दल – सलीम

मोहम्मद सलीम ने कोलकाता में पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा- हम चाहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ सभी ताकतें एकजुट होकर उनके खिलाफ लड़ें. कांग्रेस के तृणमूल और भाजपा-विरोधी मुहिम में शामिल होने के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने कहा है कि इस मुद्दे पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ता फैसला लेंगे.

2021 में सीपीएम ने कांग्रेस और आईएसएफ से किया था गठबंधन

वामदलों ने वर्ष 2021 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन में लड़ा था. हालांकि, उन दोनों का खाता तक नहीं खुला. आईएसएफ को एक सीट पर जीत मिली. सलीम ने कहा कि 3 महीने बाद होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव-पूर्व गठबंधन या सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के साथ अब तक कोई सार्थक चर्चा नहीं हुई है.

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हुमायूं कबीर पर सवाल को ऐसे टाल गये मोहम्मद सलीम

सलीम से जब पूछा गया कि क्या तृणमूल के निलंबित विधायक एवं हाल में जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) का गठन कर चुके हुमायूं कबीर का जिक्र प्रदेश समिति की बैठक में चर्चा के दौरान हुआ, इस पर उन्होंने कहा- जब माकपा विधानसभा चुनावों से पहले विचार-विमर्श करती है और अपनी संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा करती है, तो वह किसी विशिष्ट व्यक्ति पर चर्चा नहीं करती.

न्यू टाउन के होटल में कबीर से मिले थे सलीम

पिछले सप्ताह, मोहम्मद सलीम ने यहां न्यू टाउन के एक होटल में हुमायूं कबीर के साथ बैठक की थी. इसके बाद अटकलें तेज हो गयीं थीं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में दोनों पार्टियां गठबंधन कर सकती हैं.

कबीर से सलीम की क्या हुई थी बात?

मुर्शिदाबाद जिले में, बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम की वजह से विवादों में रहे तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर से मुलाकात के बाद सलीम ने कहा था- मैं उनसे (कबीर से) यह जानना चाहता था कि वह क्या करना चाहते हैं और उनका उद्देश्य क्या है. सलीम ने दावा किया कि पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने वाली ममता बनर्जी सरकार अब कह रही हैं कि अगर एसआईआर विधानसभा चुनावों के बाद हो, तो कोई समस्या नहीं है.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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