साइबर धोखाधड़ी मामले में 2.83 करोड़ की संपत्ति कुर्क

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साइबर धोखाधड़ी मामले में 2.83 करोड़ की संपत्ति कुर्क

यह संपत्तियां आरोपी सागर यादव व उनकी सहयोगी कंपनियों मेसर्स स्क्रैपिक्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कैसानोवस रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड की हैं.

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इडी, पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने की कार्रवाई, कुर्क की गयी संपत्तियों में जमीन, फ्लैट, सावधि जमा आदि शामिल कोलकाता. प्रवर्तन निदेशालय (इडी), पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने फर्जी कॉल सेंटरों से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत करीब 2.83 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है. यह संपत्तियां आरोपी सागर यादव व उनकी सहयोगी कंपनियों मेसर्स स्क्रैपिक्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कैसानोवस रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड की हैं. दोनों ही निजी कंपनियां कोलकाता में स्थित हैं. कुर्क की गयी संपत्तियों में जमीन, फ्लैट, सावधि जमा आदि शामिल हैं. इस बात की जानकारी इडी ने शुक्रवार को दी है. इडी ने आयरिश नागरिक कार्मेल फॉक्स के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी की सूचना के आधार पर मामले की जांच शुरू की, जो सीबीआइ से केंद्रीय जांच एजेंसी कार्यालय को प्राप्त हुई थी. सीबीआइ ने राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (एनसीबी)-आयरलैंड से मिली सूचना को सात अप्रैल, 2023 की सूचना को अग्रेषित किया. इडी, पटना जोनल कार्यालय ने इस मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (इसीआइआर) दर्ज करके जांच शुरू की, क्योंकि यह मामला पीएमएलए, 2002 की धारा 2(1) (आरए) में परिभाषित सीमा पार संलिप्तता के अपराध की श्रेणी में आता है और यह अपराध एक विदेशी देश में हुआ था और बाद में अपराध की आय (पीओसी) भारत में स्थानांतरित कर दी गयी थी. इडी की जांच से पता चला कि व्यक्तियों का एक समूह फर्जी कॉल सेंटर स्थापित करके विदेशी नागरिकों से साइबर धोखाधड़ी कर रहा था और साइबर धोखाधड़ी के ऐसे कृत्यों के माध्यम से उत्पन्न पीओसी को वेस्टर्न यूनियन/मनीग्राम, रीवायर, रेमिटली के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भारत में लाया गया और फिर लेंडेन क्लब, लेंडबॉक्स, लिक्विलोन्स आदि जैसे ऐप्स के माध्यम से धन शोधन के लिए इस्तेमाल किया गया. इडी ने इस मामले में अब तक सागर यादव सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है और सागर यादव, उनकी संस्थाओं और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं. आगे की जांच से पता चला कि मेसर्स स्क्रैपिक्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कैसानोवस रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दो अचल संपत्तियां खरीदी गयीं, जिनका विक्रय मूल्य पीओसी के माध्यम से चुकाया गया. इसके बाद ही इडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निजी कंपनियों की करीब 2.67 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों और सावधि जमा के रूप में लगभग 15.75 लाख रुपये मूल्य की चल संपत्तियों को अस्थायी कुर्की के तहत रखा. मामले की आगे की जांच जारी है.

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