बंगाल के प्रसिद्ध नलहाटेश्वरी शक्तिपीठ में 22 को वार्षिक अनुष्ठान, महाप्रसाद पाने के लिए करना होगा ये काम

Author Ashish Jha
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मां की प्रतिमा

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पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध नलहाटेश्वरी शक्तिपीठ में 22 जुलाई को वार्षिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं के बीच मां का महाप्रसाद वितरित किया जाएगा, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा.

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बीरभूम से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के प्रसिद्ध नलहाटेश्वरी शक्तिपीठ में 22 जुलाई को वार्षिक अनुष्ठान का भव्य आयोजन होगा. सुबह से देर शाम तक धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलेगा और 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं के बीच मां का महाप्रसाद वितरित किया जाएगा. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए न कोई टिकट लगेगा और न ही किसी तरह का शुल्क देना होगा.

पांच शक्तिपीठों में शामिल नलहाटेश्वरी मंदिर

बीरभूम के पांच शक्तिपीठों में शामिल नलहाटेश्वरी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है. तारापीठ से कुछ ही दूरी पर स्थित यह मंदिर हर साल हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है. मान्यता है कि भैरव मंदिर की स्थापना के समय यहां जमीन के नीचे से भगवान विष्णु के चरणचिह्न वाला एक शिलाखंड निकला था.आज भी सबसे पहले उसी शिलाखंड की पूजा की जाती है, उसके बाद मां नलहाटेश्वरी और भैरव की आराधना होती है.

गुप्त नवरात्रि पर विशेष पूजा

मंदिर समिति के अध्यक्ष सुनील मस्करा ने बताया कि इस वर्ष 22 जुलाई का आयोजन गुप्त नवरात्रि के दौरान पड़ रहा है. सुबह 5 बजे मंगल आरती के साथ पूजा की शुरुआत होगी. दोपहर में मां को नए वस्त्र पहनाकर विशेष श्रृंगार किया जाएगा. इसके बाद हवन-यज्ञ, विशेष पूजा और भोग का आयोजन होगा. इसके बाद प्रभात फेरी निकाली जाएगी. दोपहर में मां को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा और फिर 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण होगा.

36 जोड़ी ढाक की एक साथ प्रस्तुति

इस महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगा 36 जोड़ी ढाक की एक साथ गूंजती मंगलध्वनि. जैसे ही ढाक बजने शुरू होंगे, पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाएगा और मां के जयकारों से वातावरण गूंज उठेगा. पूरे मंदिर परिसर को प्राकृतिक फूलों से सजाया जाएगा, जिससे भक्तों को दिव्य वातावरण का अनुभव होगा.

महाप्रसाद खाने से होती है चिंता दूर

महाप्रसाद कैसे मिलेगा? मंदिर समिति ने साफ किया है कि महाप्रसाद के लिए किसी भी प्रकार का टिकट, कूपन या पंजीकरण नहीं कराया जाएगा। मंदिर परिसर और आसपास के खुले स्थानों पर श्रद्धालुओं को बैठाकर निःशुल्क प्रसाद वितरित किया जाएगा. मान्यता है कि इस शक्तिपीठ का महाप्रसाद खाने से कई रोगों और चिंताओं मुक्ति मिलती है.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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