20.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

पश्चिम बंगाल में क्यों ममता बनर्जी पर बरसी वोटरों की ‘ममता”?

अजय विद्यार्थी कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बंगाल में ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि वाम मोरचा व कांग्रेस गंठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. वहीं, भाजपा ने भी बंगाल में अपने सीटों की संख्या में इजाफा करने में सफल रही है. तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ी […]

अजय विद्यार्थी

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बंगाल में ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि वाम मोरचा व कांग्रेस गंठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. वहीं, भाजपा ने भी बंगाल में अपने सीटों की संख्या में इजाफा करने में सफल रही है. तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ी थी, जबकि वाम मोरचा और कांग्रेस ने आपस में बोझा-पोड़ा कर चुनाव मैंदान में उतरे थे, लेकिन मतदाताओं ने बोझा-पोड़ा को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उल्लेखनीय है कि 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 34 वर्षों की वाम मोरचा सरकार को पराजित कर मां, माटी, मानुष की सरकार का गठन किया था. ममता बनर्जी ने विकास को मुद्दा बना कर चुनाव लड़ा था, हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान नारदा व सारधा जैसे मुद्दे उठाये गये, लेकिन चुनाव प्रचार पर इनका कोई असर नहीं पड़ा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता से माकपा व कांग्रेस के बीच के बोझा-पोड़ा को स्वीकार नहीं किया, हालांकि कांग्रेस को बोझा-पोड़ा से फायदा हुआ. वह पिछले विधानसभा चुनाव 2011 के तर्ज पर अपनी सीटें बचाने में सफल रही, जबकि वाममोरचा को काफी सीटों को नुकसान करना पड़ा.
इससे साफ है कि वाम मोरचा को कांग्रेस समर्थकों का वोट नहीं मिला और वाम मोरचा को नुकसान का सामना करना पड़ा. चुनाव के पहले ऐसा माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को 17 फीसदी मत मिले थे. इस चुनाव में भाजपा के वोट प्रतिशत घटे हैं, लेकिन भाजपा के वोट माकपा व कांग्रेस को नहीं मिला, वरन ये वोट तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को मिले. इससे तृणमूल कांग्रेस को फायदा हुआ. इसके साथ ही अभी तक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभी तक भाजपा की केवल एक सीट थी, लेकिन चुनाव में भाजपा को फायदा हुआ और उसकी सीटों की संख्या में इजाफा हुआ है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में नारदा व सारदा के भ्रष्टाचार के मुद्दे ज्यादा कारगर साबित नहीं हुए, क्योंकि आम लोगों ने नारदा और सारदा की जगह ममता सरकार द्वारा इलाके में किये गये कार्य, क्लबों को दिये अनुदान, छात्र-छात्राओं को दी गई साइकिल, कन्याश्री के तहत अनुदान राशि, बिजली की स्थिति में सुधार, अल्पसंख्यकों को अनुदान को ज्यादा प्रश्रय दिया. चुनाव परिणाम से साफ है कि अल्पसंख्यकों व अनुसूचित जाति और जनजाति ने खुल कर ममता का समर्थन किया है.
राज्य में अल्पसंख्यकों का लगभग 27 फीसदी मत है. ममता बनर्जी की सरकार को अल्पसंख्यकों का खुल कर समर्थन मिला. चुनाव प्रचार के दौरान कहा जा रहा था कि विकास के कारण ग्रामीण मतदाता ममता के साथ रहेंगे, लेकिन शहरी मतदाता ममता के साथ नही हैं, लेकिन चुनाव परिणाम से साफ है कि ग्रामीण के साथ-साथ शहरी मतदाताओं ने भी ममता के पक्ष में ‍खुल कर मतदान किया है. इसी तरह से उत्तर बंगाल में भी जहां वाम मोरचा और कांग्रेस के गंठबंधन का दबदबा था, वहां भी तृणमूल कांग्रेस का परिणाम बेहतर रहा है.
Prabhat Khabar Digital Desk
Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel