पीएम को गलत सूचना या झूठ बोल रहे हैं : तृणमूल
Updated at : 17 Apr 2016 8:32 PM (IST)
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अजय विद्यार्थी कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया है. श्री मोदी द्वारा कृष्णनगर की सभा में चुनाव आयोग के कारण बताओ नोटिस का जवाब मुख्य सचिव द्वारा दिये जाने पर कटाक्ष करने पर तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर पलटवार किया है. तृणमूल कांग्रेस की वेबसाइट में कहा गया है कि श्री […]
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अजय विद्यार्थी
कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया है. श्री मोदी द्वारा कृष्णनगर की सभा में चुनाव आयोग के कारण बताओ नोटिस का जवाब मुख्य सचिव द्वारा दिये जाने पर कटाक्ष करने पर तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर पलटवार किया है. तृणमूल कांग्रेस की वेबसाइट में कहा गया है कि श्री मोदी ने कृष्णनगर की रैली में कहा कि चुनाव आयोग के कारण बताओ नोटिस का जवाब ममता दीदी या तृणमूल को देना चाहिए था. चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री को नहीं, वरन तृणमूल उम्मीदवार को नोटिस भेजा था. ममता दीदी ने जवाब नहीं दिया, वरन मुख्य सचिव ने उनके बदले जवाब दिया है. तृणमूल कांग्रेस की वेबसाइट में चुनाव आयोग के नोटिस को जारी किया गया है और कहा गया है कि चुनाव आयोग का पत्र अब सार्वजनिक पत्र है.
टेक-सेवी मोदी को यह पत्र ऑनलाइन पढ़ना चाहिए था. यह पत्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजा गया है न कि तृणमूल कांग्रेस और भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार को. इस कारण ही मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र का जवाब मुख्य सचिव ने दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा गया है कि क्या प्रधानमंत्री को गलत जानकारी मिली या वह झूठ बोल रहे हैं? सुश्री बनर्जी ने कहा है कि क्या इस नोटिस की पीछे राजनीतिक पक्षपात है. उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के पहले सत्य की जांच कर लेनी चाहिए थी. यदि सही कारण से कारण बताओ नोटिस दिया जाता, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी.
आसनसोल को नया जिला बनाने का निर्णय तीन माह पहले लिया गया था. आसनसोल की चुनावी सभा में कोई नयी नीति की घोषणा नहीं की गयी थी. इसके बावजूद कारण बताओ नोटिस दिया गया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक इकाई है, जिसके सदस्य केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत किये जाते हैं. वे लोग हम लोगों की तरह चुने नहीं जाते हैं. वर्तमान चेयरमैन कांग्रेस के शासन में आये थे तथा दो नये सदस्यों को भाजपा सरकार ने मनोनीत किया था. यदि कोई संवैधानिक दायरे से बाहर काम करता है और दूसरे के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करता है, तो स्थिति अपातकाल से भी बदतर हो जाती है.
यही बंगाल में हुआ है. संघीय ढांचे का पालन नहीं कर कानून-व्यवस्था मामले में हस्तक्षेप किया जा रहा है. वे लोग पूरे पुलिस प्रशासन को नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहे हैं. अपनी इच्छा से डीएम व एसपी का तबादला कर रहे हैं और उन्हें बरखास्त कर दे रहे हैं. वह चुनाव आयोग को दोष नहीं दे रही हैं, लेकिन इसके पीछे जो हैं, उनकी बात कर रही हूं. चुनाव आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी करने के पहले सच्चाई जाननी चाहिए थी. दिसंबर में झाड़ग्राम, बशीरहाट, सुंदरवन व कालीपांग जिले के साथ-साथ आसनसोल जिला बनाने का निर्णय लिया गया था. मंत्रिमंडल ने भी इस निर्णय पर मुहर लगायी थी. संभवत: वह विधानसभा में भी बोली थीं. उन्होंने कोई नयी नीति की घोषणा नहीं की थी. आयोग को अपने अधिकार का प्रयोग करने के पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए थी, लेकिन यह पूरी तरह से अधिकार का दुरुपयोग है. इसके पहले मंगलकोट में अपनी चुनावी सभा में सुश्री बनर्जी ने मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री दिल्ली से उड़ कर आते हैं और लंबी-लंबी बातें कह कर चले जाते हैं, लेकिन अल्प अवधि की बचत पर सूद की दर कम क्यों हो गयी. इसका जवाब नहीं दे रहे हैं
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