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रास मेले का आज होगा समापन

कूचबिहार : बाजार जमने से कूचबिहार के रास मेले की समय सीमा बढ़ा दी गयी है. अब इम मेले का समापन कल रविवार होगा़ ऐसे शुक्रवार को ही मेले का समापन होना होना था़ लेकिन भारी भीड़ तथा व्यवसायियों की मांग को देखते हुए इसकी तिथिर रविवार तक बढ़ा दी गयी़ इसबीच,कूचबिहार के रास मेले […]

कूचबिहार : बाजार जमने से कूचबिहार के रास मेले की समय सीमा बढ़ा दी गयी है. अब इम मेले का समापन कल रविवार होगा़ ऐसे शुक्रवार को ही मेले का समापन होना होना था़ लेकिन भारी भीड़ तथा व्यवसायियों की मांग को देखते हुए इसकी तिथिर रविवार तक बढ़ा दी गयी़

इसबीच,कूचबिहार के रास मेले में बांग्लादेश से आयी वस्तुओं की मांग बढ़ने से मेले में काफी भीड़ है. मेले में इस भीड़ को ध्यान में रखकर इसके खत्म होने की तिथि आगे बढ़ा दी गयी है. बांग्लादेश के जमदानी, हिलसा मछली, खजूर गुड़ सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी के लिये स्टॉलों पर क्रेताओं की भीड़ देखते ही बनती है.

कूचबिहार के रास मेले में बांग्लादेशी स्टॉल के व्यवसासियों का कहना है कि कूचबिहार सहित पूरे उत्तर बंगाल में बांग्लादेशी वस्तुओं की काफी ज्यादा मांग है. लेकिन वर्ष भर इन वस्तुओं को उत्तर बंगाल के विभिन्न प्रांत में लेजाकर बेचना संभव नहीं हो पाता है. दोनों देशों के बीच अगर यह सुविधा दे दी जाये तो दोनों पड़ोसी देशों के नागरिक काफी लाभांन्वित होंगे.
रास मेले में आने वाले लोगों का कहना है कि बंगाल विभाजन के समय बहुत से लोग तितर-बितर हो गये. कौन कहां बसेगा यह कुछ समझ नहीं पा रहे थे. कुछ लोग इस बंगाल में रह गये तो कुछ उस बंगाल में. लेकिन अभी भी बांग्लादेश फरीदपुर का खजूर गुड़, पद्मा नदी की हिलसा मछली, रोहितपुर का लुंगी व गमछा, टांगाईल की तांत आदि की काफी मांग है. वर्ष में एक बार ही इन बस्तुओं का आनंद लेने का अवसर रास मेले के माध्यम से मिलता है.
रास मेले में पद्मा की हिलसा मछली पांच सौ से हजार रूपये प्रतिकिलो, 150-250 रूपये प्रतिकिलो खजुर का गुड़, बांग्लादेश की लुंगी का कीमत 300 से 750 रूपया है. 550 से 1250 रूपये प्रति पीस तांत की साड़ी बिक रही है. भीड़ का बढ़ना स्वाभाविक है.
इधर बिक्रेताओं का कहना है कि रास मेले में उनके कुछ स्थायी क्रेता हैं जो रासमेला के आयोजन के पहले से ही बांग्लादेश के विभिन्न वस्तुओं का ऑर्डर देते है.
हांलाकि वहलोग मेले में लगे स्टॉल से ही अपनी मन पंसद वस्तु का संग्रह करते है. इसके अलावा रासमेला में घुमने आये दर्शक भी बांग्लादेशी स्टॉल घुमकर जाते हैं एवं अधिकांश दर्शकों को कोई ना कोई चीज पसंद आ ही जाती है. स्थानीय एक नागरिक का कहना है कि बांग्लादेश की वस्तुओं की मांग के आधार पर रासमेला में कई बांग्लादेशी स्टॉल लगते हैं. बांग्लादेश से भारत में वस्तुओं को लाने पर प्रशासन की कड़ी नजर है लेकिन इसके बाद भी रासमेले के बांग्लादेशी स्टॉल में बस्तुओं की खरीददारी के लिये लोंगो में काफी उत्साह है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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