प्रधानमंत्री और नेताजी के परिजनों के बीच 17 मई को कोई बैठक नहीं

Updated at : 08 May 2015 3:36 AM (IST)
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प्रधानमंत्री और नेताजी के परिजनों के बीच 17 मई को कोई बैठक नहीं

कोलकाता: नेताजी सुभाषचंद्र बोस के पौत्र चंद्रबोस ने आज स्पष्ट किया कि परिवार का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ 17 मई को दिल्ली में मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं है. पहले खबर दी गई थी कि बोस परिवार के सदस्य मोदी से मुलाकात कर केंद्र सरकार के पास पडे नेताजी से संबंधित गुप्त दस्तावेजों को […]

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कोलकाता: नेताजी सुभाषचंद्र बोस के पौत्र चंद्रबोस ने आज स्पष्ट किया कि परिवार का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ 17 मई को दिल्ली में मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं है.

पहले खबर दी गई थी कि बोस परिवार के सदस्य मोदी से मुलाकात कर केंद्र सरकार के पास पडे नेताजी से संबंधित गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग करेंगे.चंद्र बोस ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर कुछ भ्रामक सूचनाएं दी गईं. 17 मई को पीएमओ में मिलने के लिए कोई समय तय नहीं किया गया है.’’ उन्होंने कहा कि परिवार का प्रधानमंत्री से मिलने का समय तय करने की प्रक्रिया चल रही है. नेताजी की भतीजी चित्र घोष और एक अन्य पौत्र अभिजीत राय ने भी कहा कि परिवार को ऐसा कोई निमंत्रण नहीं मिला है.
भूमि सीमा समझौता: लोकसभाध्यक्ष ने सर्वसम्मति की भावना की प्रशंसा की नई दिल्ली: लोकसभाध्यक्ष सुमित्रामहाजन ने बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा समझौता लागू करने के लिए एक विधेयक पारित कराने के दौरान सदन में दिखी सर्वसम्मति की भावना की प्रशंसा की. इससे 41 वर्ष पुराने सीमा मुद्दे के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच क्षेत्रों का अदान.प्रदान हो सकेगा.
सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘‘यह हमारे लोकतंत्र की सुंदरता है कि सरकारें बदलने के बावजूद राष्ट्रीय प्राथमिकताएं बराकरार रहती हैं.’’ उन्होंने उम्मीद जतायी कि सदन में भविष्य में सामयिक हित के मुद्दों पर भी सकारात्मक माहौल रहेगा. उन्होंने यह बात भारत के संविधान में संशोधन के लिए विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कही. यह भारत को उस समझौते के तहत कुछ क्षेत्र अधिग्रहित करने और कुछ को बांग्लादेश को स्थानांतरित करने की इजाजत देगा है जो भारत और बांग्लादेश की सरकारों के बीच हुआ था.
इस सवाल पर कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को निजी तौर पर धन्यवाद देना भारतीय संसदीय राजनीति में कुछ सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है, लोकसभाध्यक्ष ने कहा कि वह सदन में विभिन्न दलों के बीच सहयोग की भावना की प्रशंसा करती हैं और मानती हूं कि ऐेसे आपसी सम्मान की भावना से राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का लक्ष्य बेहतर तरीके से हासिल किया जा सकता है.
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