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जूट मिलों की समस्याओं पर 21 यूनियनों ने मंत्री को सौंपा ज्ञापन

Updated at : 06 Dec 2024 2:04 AM (IST)
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जूट मिलों की समस्याओं पर 21 यूनियनों ने मंत्री को सौंपा ज्ञापन

21 ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को राज्य के श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंप लगभग 2.5 लाख जूट मिल श्रमिकों और करीब 45 लाख जूट किसानों के हितों की रक्षा की मांग की.

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कोलकाता. 21 ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को राज्य के श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंप लगभग 2.5 लाख जूट मिल श्रमिकों और करीब 45 लाख जूट किसानों के हितों की रक्षा की मांग की. यूनियनों का आरोप है कि मिल मालिक जूट के बोरों की कमी का बहाना बनाकर कार्य दिवस और शिफ्ट्स में कटौती कर रहे हैं. राज्य सरकार की अनुमति के बिना वर्क सस्पेंशन और शटडाउन के नाम पर मिलों को बंद कर रहे हैं. श्रम कानून के अनुसार श्रमिकों को ले-ऑफ का मुआवजा देना अनिवार्य है, लेकिन यह भी नहीं दिया जा रहा. इस कारण हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गये हैं.

वर्तमान में एंगस और डेल्टा जूट मिलें बंद हैं. न्यू सेंट्रल और कनोड़िया जूट मिल लंबे समय से बंद हैं. कई मिलों में कार्य दिवस और शिफ्ट्स में कटौती की गयी है, जिससे 30,000 से अधिक श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं. त्रिपक्षीय समझौते की शर्तों को लागू किए बिना मिल प्रबंधन डेली-पेड, वाउचर, कांट्रैक्ट और एजेंसी वर्कर के माध्यम से मिलों का संचालन कर रहा है. नये समझौते के तहत राज्य सरकार को छह महीने के भीतर श्रमिकों की श्रेणीकरण प्रक्रिया पूरी करनी थी और वेतन वृद्धि के लिए ग्रेड एवं स्केल निर्धारित करना था. लेकिन इस दिशा में भी राज्य सरकार की निष्क्रियता स्पष्ट है. कुछ मिलों में 50 वर्ष से अधिक उम्र के श्रमिकों को जबरन अन्य विभागों में स्थानांतरित किया गया, जिससे वे अधिक दबाव में काम करने को मजबूर हो गये. इसका विरोध करने पर मिल प्रबंधन ने मिलें बंद कर दीं.

नये समझौते के अनुसार, सेवानिवृत्त श्रमिकों के पीएफ और ग्रेच्युटी का भुगतान एक वर्ष के भीतर किया जाना था, लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. कोविड काल में शुरू की गयी सीधी ड्यूटी को अब स्थायी रूप से लागू किया जा रहा है, जबकि इसे श्रमिक संघों की सहमति के बिना लागू करना समझौते का उल्लंघन है. महिला श्रमिकों को नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम कानून का स्पष्ट उल्लंघन है. बढ़ती महंगाई और इस स्थिति के कारण जूट मिल श्रमिकों में असंतोष बढ़ रहा है.

इन समस्याओं के समाधान और समझौते को लागू करने के लिए तुरंत त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने की मांग भी ज्ञापन में की गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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