पश्चिम बंगाल में एनआरसी जरूरी : भाजपा
Updated at : 27 Dec 2019 5:03 AM (IST)
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कोलकाता : राज्य भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने गुरुवार को आरोप लगाया कि घुसपैठिये सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के वोट बैंक बन गये हैं. इसलिए राज्य में एनआरसी जरूरी है. उन्होंने एनपीआर का विरोध करने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की और आरोप लगाया कि देश के लिए हर अच्छी चीज का विरोध करना उनकी […]
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कोलकाता : राज्य भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने गुरुवार को आरोप लगाया कि घुसपैठिये सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के वोट बैंक बन गये हैं. इसलिए राज्य में एनआरसी जरूरी है. उन्होंने एनपीआर का विरोध करने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की और आरोप लगाया कि देश के लिए हर अच्छी चीज का विरोध करना उनकी आदत बन चुकी है. घोष ने संवाददाताओं से कहा: पश्चिम बंगाल में एनआरसी लागू होना चाहिए. ममता बनर्जी को घुसपैठियों की मदद की जरूरत है, क्योंकि वो उनके वोटबैंक बन चुके हैं .
उन्होंने कहा : पहले यहां नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने दीजिए फिर हम देखेंगे कि एनआरसी के साथ क्या हो सकता है. असम में एनआरसी को अद्यतन किए जाने के संबंध में घोष ने कहा कि भाजपा का इससे कोई संबंध नहीं है क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ है . उन्होंने कहा, ‘लेकिन, कुछ चूक हुई है जिसका फिलहाल निराकरण किया जा रहा है .’
एनपीआर के बारे में उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने 2010 में इसकी शुरूआत की थी. इसके बाद हम (भाजपा) सत्ता में आये. यह सरकार का दायित्व है कि प्रक्रिया को जारी रखे. उन्होने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों को बरगलाया जा रहा है. इसके खिलाफ भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर रही है. यह लोग आम लोगों के घरों में जाकर एनआरसी के महत्व को समझायेंगे और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील करेंगे.
इसी कड़ी में दिलीप घोष लोगों से मिलने व उन्हें समझाने के लिए चितपुर गुरुद्वारा के सामने चाय दुकान पर पहुंचे जहां उन्होंने लोगों के साथ चाय पर चर्चा की. कार्यक्रम का आयोजन उत्तर कोलकाता जिला भाजपा की ओर से महासचिव आशीष त्रिवेदी ने किया था. कार्यक्रम के बाद प्रदेश पार्टी कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को प्रशासन चलाना नहीं आता है. वह यहां पर घुसपैठियों और अपराधियों के दम पर राजनीति कर रही हैं.
यही वजह है कि पूरे प्रदेश को दंगाई अपनी चपेट में ले लेते हैं और सरकारी संपत्ति का नुकसान करते हैं. अकेले रेल को तीन सौ करोड़ का नुकसान हुआ है. पुलिस ने एक भी दंगाई के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि उत्तर प्रदेश में प्रशासन सख्त होकर स्थिति से निपटने में सफल रहा. नतीजतन दंगाई व बलवाई या तो गोली खा रहे हैं अथवा जेल में नजर आ रहे हैं.
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