शादी से पहले लड़का व लड़की का ब्लड टेस्ट कराना जरूरी
Updated at : 13 Nov 2019 2:31 AM (IST)
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बोले डॉ प्रशांत कुमार चौधरी कोलकाता : थैलेसीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता से संतान को होती है. इस बीमारी से ग्रस्त शरीर में लाल रक्त कण बनने बंद हो जाते हैं. इससे शरीर में रक्त की कमी आ जाती है. बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है. रंग पीला पड़ जाता है. इस रोग से […]
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बोले डॉ प्रशांत कुमार चौधरी
कोलकाता : थैलेसीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता से संतान को होती है. इस बीमारी से ग्रस्त शरीर में लाल रक्त कण बनने बंद हो जाते हैं. इससे शरीर में रक्त की कमी आ जाती है. बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है. रंग पीला पड़ जाता है. इस रोग से बच्चों में जिगर, तिल्ली और हृदय का साइज बढ़ने, शरीर में चमड़ी का रंग काला पड़ने जैसी विकट स्थितियां पैदा होती हैं.
इस रोग को लेकर महिला के प्रसव से पूर्व ध्यान रखने की ज़रूरत है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल जनसंख्या की 4-5 फीसदी महिलाएं थैलेसीमिया के चंगुल में हैं जबकि 14-16 फीसदी लोग इस बीमारी के वाहक हैं. ये बातें डॉ प्रशांत कुमार चौधरी ने कहीं. बाल दिवस के पूर्व उन्होंने थैलेसीमिया के रोकथाम के लिए जागरूकता पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि शादी से पहले लड़के और लड़की का ब्लड टेस्ट कराना बहुत जरूरी है. यदि ब्लड टेस्ट में दोनों के ब्लड में माइनर थैलेसीमिया पाया जाए तो बच्चे को मेजर थैलेसीमिया होने की पूरी संभावना बन जाती है. ऐसी स्थिति में मां के 10 सप्ताह तक प्रेगनेंट होने पर शिशु की जांच होनी चाहिए. इससे गर्भ में पल रहे बच्चे में थैलेसीमिया की बीमारी का पता लगाया जा सकता है.
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