वामपंथी ही कर सकते हैं सांप्रदायिकता का मुकाबला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Oct 2019 2:24 AM
कोलकाता : देश में जिस तरह से सांप्रदायिक ताकतें बढ़ रही हैं, उनका मुकाबला सिर्फ वामपंथी विचारधारा के लोग ही कर सकते हैं. यह बात माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने नेताजी इंडोर स्टेडियम में भारत में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित सभा में कही. उन्होंने कहा […]
कोलकाता : देश में जिस तरह से सांप्रदायिक ताकतें बढ़ रही हैं, उनका मुकाबला सिर्फ वामपंथी विचारधारा के लोग ही कर सकते हैं. यह बात माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने नेताजी इंडोर स्टेडियम में भारत में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित सभा में कही. उन्होंने कहा कि देश दक्षिणपंथी ताकतों के बढ़ते कदम से संकट में है और इसका मुकाबला वामपंथी ही कर सकते हैं, क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही पूर्ण स्वराज की मांग करनेवाले कम्युनिस्ट ही धर्मनिरपेक्ष भारत की नींव रखे थे. उन्होंने कहा कि देश में दो विचारधारा के लोग खुद को स्थापित करने में मजबूती से जुटे में हैं.
एक तबका है, जो हिंदू राष्ट्रवाद की वकालत कर रहा है, तो दूसरा राष्ट्रवाद की बात कर रहा है. इन दोनों खतरों से वामपंथी ही निपट सकते हैं. लेकिन यह सच है कि पहले के मुकाबले वामपंथियों की ताकत कमजोर हुई है. अतीत में दो दशक ऐसे रहे जब केंद्र में किसकी सरकार हो, इसका निर्धारण माकपा ही करती थी. फासीवाद की बढ़ती ताकत के कारण वामपंथी कमजोर जरूर हुए हैं, लेकिन खत्म नहीं. इसलिए उन्हें फिर से अपनी ताकत को बढ़ाते हुए जन आंदोलन के रास्ते से सबको जोड़ते हुए आनेवाले संकट का मुकाबला करना होगा.
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