कोलकाता के शेरिफ बने मणिशंकर मुखर्जी

कोलकाता : प्रख्यात लेखक मणिशंकर मुखर्जी को कलकत्ता हाइकोर्ट में सोमवार को ‘शेरिफ’ पद की शपथ दिलायी गयी. वह शहर के 245वें शेरिफ हैं. निवर्तमान शेरिफ डॉ संजय चटर्जी ने शंकर के नाम से लोकप्रिय 80 वर्षीय लेखक को पद की शपथ दिलायी. कोलकाता के किसी विशिष्ट नागरिक को एक साल के लिये इस पद […]
कोलकाता : प्रख्यात लेखक मणिशंकर मुखर्जी को कलकत्ता हाइकोर्ट में सोमवार को ‘शेरिफ’ पद की शपथ दिलायी गयी. वह शहर के 245वें शेरिफ हैं. निवर्तमान शेरिफ डॉ संजय चटर्जी ने शंकर के नाम स�� लोकप्रिय 80 वर्षीय लेखक को पद की शपथ दिलायी. कोलकाता के किसी विशिष्ट नागरिक को एक साल के लिये इस पद पर नियुक्त किया जाता है.
शेरिफ का कार्यालय कलकत्ता हाइकोर्ट परिसर में होता है. 1775 में शहर के लिये ‘शेरिफ’ पद का निर्माण किया गया था और जेम्स मैक्रेबी पहले शेरिफ थे. ‘कलकत्ता के शेरिफ’ पद पर नियुक्त किये गये पहले भारतीय मनकजी रूस्तमजी थे जो 1874 में इस पद पर नियुक्त किये गये थे, जबकि 1875 में इस पद पर पहली बार राजा दिगंबर मित्तर के तौर पर किसी बंगाली को नियुक्त किया गया था.
गौरतलब है कि 7 दिसंबर 1933 को बांग्लादेश के बनगांव में मणिशंकर मुखर्जी का जन्म हुआ था.श्री मुखर्जी के पिता हरिपद मुखोपाध्याय एक वकील थे. 1937 में मणिशंकर पिता के साथ कलकत्ता चले आये. मणिशंकर मुखर्जी का बचपन हावड़ा में बीता. उन्होंने बांग्ला में कई किताबें लिखी हैं. इसमें चौरंगी, जनअरण, अचेना-अंजाना विवेकानंद और सीमाबद्ध प्रमुख हैं.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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