कोलकाता : नसबंदी में कोताही से महानगर में बढ़ी कुत्तों की फौज

Updated at : 13 Feb 2019 2:29 AM (IST)
विज्ञापन
कोलकाता :  नसबंदी में कोताही से महानगर में बढ़ी कुत्तों की फौज

शिव कुमारराउत, कोलकाता इंसान के वफादार साथी कहे जानेवाले कुत्ते इन दिनों महानगरवासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं. गली-मोहल्ला, चौक-चैराहों से लेकर अस्पताल परिसर में झुंड में घूमते ये कुत्ते लोगों को काट रहे हैं. हद तो तब हो गयी जब इन कुत्तों ने एनआरएस मेडिकल कॉलेज में एक बच्चे को काट […]

विज्ञापन

शिव कुमारराउत, कोलकाता

इंसान के वफादार साथी कहे जानेवाले कुत्ते इन दिनों महानगरवासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं. गली-मोहल्ला, चौक-चैराहों से लेकर अस्पताल परिसर में झुंड में घूमते ये कुत्ते लोगों को काट रहे हैं. हद तो तब हो गयी जब इन कुत्तों ने एनआरएस मेडिकल कॉलेज में एक बच्चे को काट लिया और इससे तंग आकर हाल ही में इस अस्पताल में 16 पिल्लों को पीट-पीट कर मार डाला गया. इस पर खूब हंगामा हुआ था.
कुत्तों का यह उपद्रव नया नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार हर दो-चार साल में ऐसा होता है. तब निगम की ओर से बताया जाता है कि कुत्तों की बढ़ती संख्या पर काबू पाने के लिए उनकी नसबंदी की जा रही है. लेकिन आंकड़े दूसरी ही कहानी कहते हैं. इनके अनुसार वर्ष 2012 में महानगर में आवारा कुत्तों की कुल संख्या 65 हजार थी, जो अब बढ़कर लगभग डेढ़ लाख तक पहुंच गयी है.
इसकी पुष्टि खुद कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम भी कर चुके हैं. इसी बीच, फिर से निगम की ओर से कुत्तों की धर-पकड़, नसबंदी व टीकाकरण की जा रही है. पशु चिकित्सकों का मानना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर रोकने लगाने का एकमात्र कारगर उपाय नसबंदी ही है. पर नसबंदी के नाम पर हो रही खानापूर्ति को रोकना होगा और सही संस्थाओं को इसकी जिम्मेवारी सौंपनी होगी.
आमतौर पर नसबंदी के बाद कुत्तों को सात दिनों तक चिकित्सकीय निरीक्षण में रखने का नियम है. पर इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है. कई बार ऐसे भी मामले देखे गये है जिसमें नसबंदी के बाद भी कुत्तों ने पिल्लों को जन्म दिया है.
कंट्रोल रूम में करें शिकायत
आवारा कुत्तों से परेशानी की शिकायत निगम के कंट्रोल रूम में कर सकते हैं. वर्ष 2012 से ही यह सेवा में हैं. हेल्पलाइन नंबर है-9674185667. सूचना मिलते ही निगम के कर्मचारी उस जगह पर पहुंच कर उन आवारा कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण कर उन्हें वापस वहीं छोड़ देते हैं, जहां से उन्हें उठाया गया था.
पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन जरूरी
कोलकाता नगर निगम के पब्लिक सेफ्टी (हेल्थ विंग निगम) के को-ऑर्डिनेटर राजीव घोष ने बताया कि केएमएसी एक्ट के तहत पालतू कुत्तों का टीकाकरण कर उसका रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है. कुत्तों के रजिस्ट्रेशन लिए निगम को विभिन्न बोरो अॉफिस के लाइसेंस विभाग में फाॅर्म दिया जाता है.
रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के बाद कुत्ते के मालिक को हर साल 150 रुपये देकर लाइसेंस का नवीकरण करवाना होता है. लेकिन कुत्ते पालने वाले एक भी पशु प्रेमी लोग इस लाइसेंस के लिए निगम में आवेदन ही नहीं करते हैं, जबकि महानगर में करीब 15-20 हजार पालतू कुत्ते हैं. उन्होंने कहा कि पालतू कुत्तों को हर साल एंटी रैबीज टीका लगवाना जरूरी है.
निगम के कुछ वार्डों में रैबीज की समस्या
श्री घोष ने बताया कि कोलकाता नगर निगम के वार्ड संख्या 112, 113, 114 व 115 में रैबीज होने की शिकायत मिली है. इन वार्डों में लोमड़ी के कारण कुत्ते रैबीज की चपेट में आ रहे हैं. इस कारण इन इलाकों से हर महीने 8-10 कुत्ते रैबीज से पीड़ित मिल जाते हैं, क्योंकि लोमड़ी व बंदर रैबीज के जीवाणु के वाहक माने जाते हैं.
गौरतलब है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की वर्ष 2009 की रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल 55 हजार से अधिक मौतें रैबीज के कारण होती हैं. इनमें से 20 हजार मामले भारत के हैं. ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए निगम के साथ-साथ कुत्तों के लिए काम करनेवालीं स्वंयसेवी संस्थाओं व आमलोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola