मोदी ने फूंका चुनावी बिगुल, भीड़ देख हुए गदगद

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Feb 2019 1:06 AM

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दुर्गापुर और ठाकुरनगर की सभा में प्रधानमंत्री ने तृणमूल पर बोला हमला कहा-भाजपा को मिल रहे जनसमर्थन से घबरा गयी हैं ‘दीदी’ दुर्गापुर/ठाकुरनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी दो जनसभाओं के जरिये राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के अभियान का बिगुल फूंका. उन्होंने उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर और पश्चिम […]

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दुर्गापुर और ठाकुरनगर की सभा में प्रधानमंत्री ने तृणमूल पर बोला हमला

कहा-भाजपा को मिल रहे जनसमर्थन से घबरा गयी हैं ‘दीदी’

दुर्गापुर/ठाकुरनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी दो जनसभाओं के जरिये राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के अभियान का बिगुल फूंका. उन्होंने उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर और पश्चिम बर्दवान के दुर्गापुर में आयोजित सभा में राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा प्रहार किया. दोनों ही सभाओं में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी.

दुर्गापुर के नेहरू स्टेडियम में भाजपा की गणतंत्र बचाओ रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा : पश्चिम बंगाल में ट्रीपल टी (तृणमूल तोलाबाजी टैक्स) हर क्षेत्र में प्रभावी है. इसे समाप्त करने के लिए राज्य में बदलाव जरूरी है. उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की तपस्या बेकार नहीं जायेगी. वह राज्य से तृणमूल की विदाई साफ तौर पर देख पा रहे हैं. सभा में जुटी भारी भीड़ से मोदी काफी प्रफुल्लित नजर आये.

मोदी ने कहा कि सिंडिकेट राज से राज्य को मुक्त कराना ही होगा. भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ तृणमूल जो बर्ताव कर रही है, वह तकलीफदेह है. उनकी यह तपस्या, बलिदान बेकार नहीं जायेगा. तृणमूल बुझता दीपक है जो अधिक फफक रही है.

उन्होंने राज्य में सीबीआइ पर लगे प्रतिबंध की चर्चा करते हुए कहा कि जब गलती नहीं की है तो जांच एजेंसी से ‘दीदी’ क्यों डरती हो? गुजरात में सीएम रहते हुए उन्हें भी परेशान किया जाता था. लेकिन वे कभी ऐसा निर्णय नहीं लेते थे.

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थानों की रक्षा जरूरी है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार एवं सिंडिकेट के कारण ही राज्य में केंद्रीय योजनाएं अब तक सही तरीके से लागू नहीं हो पा रही है. चुनावी लाभ के लिए आयुष्मान भारत को लागू करने से इनकार कर दिया गया है. सिंडिकेट तोलाबाजी टैक्स न मिलने के कारण केंद्रीय योजनाएं कारगर साबित नहीं हो रही है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिगेड मैदान में उन नेताओं की भीड़ जमा हुई जिनका कोई न कोई रिश्तेदार या तो जेल में हैं या जमानत पर है. जो एक दूसरे का चेहरा देखना पसंद नहीं करते थे, एक दूसरे को जेल की हवा खिलाने की योजना बनाते थे, सभी उनके (मोदी) खिलाफ एक हो गये हैं. चिटफंड, घूसखोर, रक्षा सौदा घोटाले वाले एक दूसरे से हाथ मिला रहे हैं.

उन्होंने कहा कि रियल इस्टेट के लिए बने रेका को राज्य में लागू नहीं किया गया. राज्य में भाजपा के बढ़ते जनाधार को देखकर ही ममता सरकार की नींद उड़ गयी है. वह लोकतंत्र का गला घोंटकर आवाज दबाने में लगी है. लेकिन यह सब अधिक दिनों तक नहीं चलने वाला है.

मोदी ने अंतरिम बजट की विभिन्न विशेषताओं की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही 12 करोड़ किसानों के बैंक खाते में राशि जमा हो जायेगी. उन्होंने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बीमा योजना की चर्चा की. उन्होंने कहा कि पांच लाख तक की आय वालों को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है. इससे तीन करोड़ करदाता सीधे लाभान्वित होंगे.

उधर, इससे पहले उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा: राज्य में अब किसी को डरना नहीं होगा. न ही अब किसी को सिंडिकेट टैक्स देना होगा. न ही उन्हें कोई अन्य दिक्कत आयेगी. आम लोगों के बैंक खाते में सीधे हर योजना का पैसा जमा होगा. यही वजह है कि अभी तक अकेले पश्चिम बंगाल में तीन करोड़ लोगों का बैंक खाता खुला है. सभा में मतुआ संप्रदाय के लोगों की भागीदारी रही. भारी भीड़ के चलते भगदड़ की आशंका में प्रधानमंत्री ने महज 14 मिनट में अपना भाषण समाप्त कर दिया. उन्होंने कहा कि बड़ी मां और हरिचांद के वंशजों (मतुआ संप्रदाय) के बीच आकर उन्हें गौरव महसूस हो रहा है. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी अनेक दशकों तक गांव की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया. बंगाल की स्थिति और भी खराब है. जो बीत गया सो बीत गया. अब नया भारत इस स्थिति में नहीं रह सकता है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि सभा में मौजूद भीड़ के दृश्य देख कर समझ में आ रहा है कि ममता दीदी हिंसा पर क्यों उतारु हैं. क्यों लोकतंत्र बचाव का नाटक करने वाले लोग निर्दोष लोगों की हत्या पर तुले हुए है. उन्हो‍ंने कहा कि स्वार्थी दलों ने किसानों की आंख में धूल झोंकने का प्रयास किया है. तीन राज्यों में हाल ही में किसानों की कर्ज माफी का वादा कर सत्ता में आने वाली सरकारों पर तंज कसते हुए उन्होने कहा कि किसानों का किसी ने कोई भला नहीं किया है. जो लाभ मिला है वह चंद किसानों को ही मिला है. बाकी किसान आजादी से अब तक अपनी भलाई का इंतजार करते आ रहे है . कुछ राज्यों में किसानों से कर्ज माफी के नाम पर वोट मांगे गये, यह कहानी मध्य प्रदेश की है. उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान योजना बनायी गयी है, इसमें 75 हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के टुकड़े कर के हम आजाद हुए. लोगों पर जुल्म और अत्याचार हुए. यह सब देख कर उन्होंने नागरिकता का कानून लाया है और यह उन सभी पीड़ित भाइयों के लिए बेहतर होगा. जो विभिन्न धर्मो‍ं को मानते थे और अपने धर्म और इज्जत बचाने के लिए इस देश में आये. लिहाजा तृणमूल कांग्रेस को भी नागरिकता विधेयक का समर्थन करना चाहिए.

रैली में भगदड़ जैसी स्थिति, कई घायल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में अपनी रैली में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाने के बाद अपना भाषण बीच में ही बंद कर दिया. भगदड़ की स्थिति उत्पन्न होने से कई लोग घायल हो गये. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई महिलाएं और बच्चे घायल हो गये. दरअसल जब प्रधानमंत्री मतुआ समुदाय की रैली को संबोधित कर रहे थे तब आयोजन स्थल के बाहर खड़े उनके सैकड़ों समर्थकों ने रैली ग्राउंड के अंदरुनी हिस्से में आने की कोशिश की जिससे भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी.

मोदी ने उन लोगों से अपनी ही जगह पर बने रहने और आगे आने की कोशिश नहीं करने का आह्वान कर भीड़ को शांत करने का प्रयास किया. लेकिन उनके आग्रह का कोई असर नहीं पड़ा एवं समर्थक मंच के सामने खाली जगह में कुर्सियां फेंकने लगे ताकि अंदरुनी हिस्से में जगह बन पाये जबकि यह जगह महिला समर्थकों के लिए निर्धारित थी. इस हो-हल्ले के बाद प्रधानमंत्री ने अचानक यह कहते हुए अपना भाषण बंद कर दिया कि उन्हें दूसरी रैली में जाना है. पुलिस अधिकारी के अनुसार भगदड़ जैसी स्थिति के दौरान कई महिलाएं और बच्चे बेहोश हो गये. उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया. इस घटना से प्रधानमंत्री की पिछले साल की 16 जुलाई की रैली याद आती है जब पश्चिम मिदनापुर जिले में मंच गिर गया था और कई लोग घायल हो गये थे.

मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर की आरोपों की बौछार

पश्चिम बंगाल में ट्रीपल टी (तृणमूल तोलाबाजी टैक्स) हर क्षेत्र में प्रभावी है. इसे समाप्त करने के लिए राज्य में बदलाव जरूरी है.

सिंडिकेट राज से राज्य को मुक्त कराना ही होगा. भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ तृणमूल जो बर्ताव कर रही है, वह तकलीफदेह है. उनकी यह तपस्या, बलिदान बेकार नहीं जायेगा.

जब गलती नहीं की है तो जांच एजेंसी से ‘दीदी’ क्यों डरती हो? गुजरात में सीएम रहते हुए मुझे भी परेशान किया जाता था. लेकिन हम कभी ऐसा निर्णय नहीं लेते थे.

चुनावी लाभ के लिए आयुष्मान भारत को लागू करने से इनकार कर दिया गया है. सिंडिकेट तोलाबाजी टैक्स न मिलने के कारण केंद्रीय योजनाएं कारगर साबित नहीं हो रही है.

राज्य में भाजपा के बढ़ते जनाधार को देखकर ही ममता सरकार की नींद उड़ गयी है. वह लोकतंत्र का गला घोंटकर आवाज दबाने में लगी है.

देश के टुकड़े कर के हम आजाद हुए. लोगों पर जुल्म और अत्याचार हुए. लोग भारत में आने के लिए मजबूर हुए. यह सब देख कर नागरिकता कानून लाया गया है. तृणमूल कांग्रेस को भी नागरिकता विधेयक का समर्थन करना चाहिए.

पीएम के आरोपों पर ममता का बिंदुवार जवाब

विदाई घंटा तृणमूल का नहीं, बल्कि भाजपा के लिए बजा है. उनका (भाजपा) एक्सपायरी का समय हो गया है

सिंडिकेट के दो मतलब हैं. मोहल्ले के लड़के एक साथ हो जाते हैं तो वह भी सिंडिकेट हो जाता है. सिंडिकेट से वह क्या समझते हैं. दंगा, गो रक्षक, जीएसटी, नोटबंदी का सिंडिकेट लोग सहन नहीं करेंगे.

हर नेता की जुबान बंद करने के लिए फासिस्ट तरीके से केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिये घेरा गया है. एक प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें (मोदी) क्या कहना चाहिए यह नहीं पता. सामान्य शिष्टाचार उनमें नहीं है.

राज्य सरकार निशुल्क चिकित्सा सुविधा देती है. भाजपा के राज में 12 हजार किसानों ने आत्महत्या की है.

नागरिकता विधेयक के समर्थन का सवाल ही नहीं है. दंगा करने के लिए वह समर्थन नहीं देंगी. बिहारी, बंगाली भगाने के लिए समर्थन नहीं दिया जा सकता. समूचा भारत एक रहेगा, वह विदा होंगे. नागरिकता बिल का तृणमूल विरोध कर रही है.

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