कोलकाता : भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल कसेगा आयुष मंत्रालय, जारी की निर्देशिका
Author Prabhat khabar digital desk
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शिव कुमार राउत, कोलकाता : आयुर्वेद से दो माह में गंजापन से मिलेगा छुटकारा, 30 साल पुरानी हड्डी की बीमारी होगी दूर, सेक्स से संबंधित समस्या का होगा समाधान, त्वचा रोग से मिलेगी निजात, महज 30 दिन में 50 किलोग्राम वजन हो सकता है कम जैसे भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ आयुष मंत्रालय ने सख्ती से […]
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शिव कुमार राउत, कोलकाता : आयुर्वेद से दो माह में गंजापन से मिलेगा छुटकारा, 30 साल पुरानी हड्डी की बीमारी होगी दूर, सेक्स से संबंधित समस्या का होगा समाधान, त्वचा रोग से मिलेगी निजात, महज 30 दिन में 50 किलोग्राम वजन हो सकता है कम जैसे भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ आयुष मंत्रालय ने सख्ती से निपटने की तैयारी कर ली है.
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भारत के राजपत्र में अधिसूचना जारी कर आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध के औषधियों के भ्रामक विज्ञापनों जैसे कैंसर का शर्तिया इलाज, सेक्स की ताकत बढाने, लंबाई बढ़ाने, बाल मजबूत करने, मोटापा घटाने, डायबिटीज को छू मंतर करने वाले जैसे विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.
ऐसा करने पर आयुर्वेदीय औषधि निर्माता का अमुक विज्ञापित औषधि का निर्माण लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा. 21 दिसम्बर 2018 को जारी नयी अधिसूचना के अनुसार अब प्रत्येक आयुर्वेदीय औषधि निर्माता यदि अपनी औषधि का विज्ञापन करना चाहता है तो उसे विज्ञापन के लिए राज्य सरकार के औषधि लाइसेंस प्रदाता से अनुमति ल���नी होगी.
मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों से उस आयुर्वेद औषधि निर्माता को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करने को कहा है. यह विशिष्ट पहचान संख्या तभी जारी की जायेगी, जब मिर्माता यह सुनिश्चित करेगा कि उसका विज्ञापन नियम संख्या 120, औषधि एवं प्रसाधन नियमावली के अनुरूप ही है.
इस अधिनियम में वर्तमान में तरह तरह के उत्पादों का भ्रामक प्रचार कर रहे निर्माताओ को तीन माह का समय दिया गया है कि वो अपने निर्माण स्थल के राज्य सरकार से “ विज्ञापन हेतु नियमानुरूप “ विशिष्ट पहचान संख्या “ प्राप्त करे और नये विज्ञापन करे. यह अधिनियम राज्य सरकारों से अपील करता है कि वो विज्ञापन के निवेदनो का निस्तारण एक माह के भीतर कर दे.
निम्न स्थितियों में निर्माता का विज्ञापन आवेदन रद्द कर दिया जायेगा, यदि यह अपूर्ण हो
आशयित विज्ञापन के निर्माता का सम्पर्क पता पूर्ण रूप से नहीं दिया गया हो. ऐसे विज्ञापनों में अक्सर सिर्फ मोबाइल नंबर होता है .
विज्ञापन की विषय वस्तु में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अश्लीलता झलकती हो .
किसी ऐसे आयुर्वेदीय औषधि जो उस औषधि के उपयोग से पुरुष अथवा महिला के यौनांगो की लम्बाई अथवा आयाम या क्षमता में निष्पादन में वृद्धि का सुझाव देता हो .
यह प्रतिष्ठित व्यक्तियों या सरकारी अधिकारियो के फोटो के साथ हो.
यह सरकार या सरकार के स्वायत संगठन का नाम देता हो
यह आयुर्वेदीय औषधि के बारे में मिथ्या प्रभाव डालता हो यह विज्ञापन उस अमुक आयुर्वेदीय औषधि के बारे में भ्रामक या अतिरंजित दावा करता हो.
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