जहां घर-घर में चलती हैं मौत की फैक्ट्रियां!

Updated at : 03 Nov 2018 5:41 AM (IST)
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जहां घर-घर में चलती हैं मौत की फैक्ट्रियां!

कोलकाता : पिछले कुछ सालों में बंगाल के कई जिलों में एक के बाद एक पटाखे की फैक्ट्रियों में आग लगने और विस्फोट की घटनाएं हो चुकी हैं. हर साल कइयों की जान भी गयी. इसके बावजूद महानगर से सटे जिलों में धड़ल्ले से अवैध रूप से पटाखे की फैक्ट्रियां चल रही हैं. प्रशासन की […]

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कोलकाता : पिछले कुछ सालों में बंगाल के कई जिलों में एक के बाद एक पटाखे की फैक्ट्रियों में आग लगने और विस्फोट की घटनाएं हो चुकी हैं. हर साल कइयों की जान भी गयी. इसके बावजूद महानगर से सटे जिलों में धड़ल्ले से अवैध रूप से पटाखे की फैक्ट्रियां चल रही हैं. प्रशासन की ओर से ना कोई ठोस कदम उठाया गया और ना ही मौत की ऐसी फैक्ट्रियों पर कोई लगाम लगाया जा सका.
नतीजा आज यह है कि उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी के मामुदपुर ग्राम पंचायत इलाके में ऐसे कई ग्राम हैं, जहां घर-घर में पटाखे की अवैध फैक्ट्री चलायी जा रही हैं, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. यह फैक्ट्रियां मामुदपुर के भावगाछी, देवक ग्राम के बाद अब तेजी से कुलियागढ़ ग्राम की तरफ भी पांव पसार रही हैं.
धीरे-धीरे घर-घर फैला बारूदी कारोबार
नैहाटी के मामुदपुर ग्राम पंचायत इलाके में करीब 30 हजार आबादी है. दो दशक से ग्राम पंचायत के देवक ग्राम में कुछेक घरों में छोटे स्तर पर रोशनी वाले पटाखों से लेकर छोटे-छोटे पटाखे तैयार किये जाते रहे हैं. इन इलाकों में प्रारम्भ से ही पुलिस की सुस्ती से आज घर-घर में यह पेशा बन गया है. यहां से बननेवाले पटाखे बड़े स्तर पर त्योहारों में खरीदे जाते हैं, यहीं नहीं लोग शहर के छोटे दुकानदार भी वहां से बड़े पैमाने पर सस्ते दरों पर पटाखे लाकर बेचते हैं. डिमांड बढ़ने के साथ-साथ कमाई का जरिया होने से इलाके के घरों में यह बारूदी कारोबार फैलने लगा है.
सैकड़ों घर, तीन हजार लोग जुड़े हैं धंधे से : पटाखे बनाने का काम आरम्भ में देवक ग्राम के कुछ घरों में शुरू हुआ, लेकिन आज देवक, भावगाछी और कुलियागढ़ मिला कर कुल सैकड़ों घर हैं, जहां बारूद से पटाखे तैयार होते हैं. तीनों ग्रामों को मिलाकर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब चार हजार लोग इस धंधे से जुड़े हैं.
पेशे में अधिक बच्चे और महिलाएं हैं शामिल
इस धंधे में अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जो घर में बैठे कमाने के उद्देश्य से पटाखे तैयार करते हैं. ऐसे में बच्चों का भविष्य बारूद से पटाखे तैयार करने में बीत रहा है. इनके लिए भी खतरा बना है. साल भर पहले ही देवक ग्राम में पटाखे की फैक्ट्री में हुए विस्फोट से पांच लोगों की मौत भी हुई थी. यहीं नहीं अक्सर आग लगने और विस्फोट की घटनाएं होती रहती हैं.
छह एफआइआर, 200 किलो से ज्यादा पटाखें जब्त
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसी बात नहीं है कि कार्रवाई नहीं होती. हाल के कुछ दिनों में ही इलाके में प्रतिबंधित पटाखे बनाने और उसकी बिक्री से संबंधित छह एफआइआर दर्ज की गयी है. इलाके से कइयों की गिरफ्तारी भी हुई है. पुलिस हमेशा तत्परता से काम कर रही है. पूजा के पहले से ही लगातार पुलिस छापेमारी करती है. इस बार भी निरंतर अभियान चला कर कार्रवाई की जा रही है. पिछले कुछ दिनों से लगातार अभियान चलाया जा रहा है.
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों में ग्राम की महिलाएं हाथ खर्चा और बच्चों के भविष्य के लिए ही ऐसा करती हैं. रोजी-रोटी का दूसरा साधन नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में ही ऐसा काम करते हैं. अगर सरकार की ओर से रोजगार की व्यवस्था हो जाये तो लोग इतना जोखिम भरा काम नहीं करेंगे.
इन जिलों में भी है खतरा
केवल उत्तर 24 परगना ही नहीं, बल्कि कोलकाता से सटे हावड़ा, हुगली, दक्षिण 24 परगना के साथ-साथ पश्‍चिम मिदनापुर, बर्दवान समेत कई जिलों में आज भी धड़ल्ले से पटाखे की फैक्ट्रियां चल रही है. पूजा में अक्सर इन जिलों में घटनाएं भी होती हैं. खासकर दुर्गापूजा पूजा और काली पूजा के मध्य ही अक्सर घटनाएं होती हैं. पुलिस कार्रवाई के बाद फिर नजारा जस का तस हो जाता है.
प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार
राज्य सरकार को ग्राम के लोगों पर ध्यान देना चाहिए. रोजगार सृजन होने पर लोग कम ही ऐसे धंधे में मौत को गले लगायेंगे. यही नहीं, पुलिस प्रशासन की भी सुस्ती व लापरवाही का ऐसी फैक्ट्रियां नतीजा हैं. अगर सख्ती से कार्रवाई की जाये, तो ऐसे धंधे नहीं बढ़ेंगे. असामाजिक कार्यों के लिए ऐसे पटाखे के जरिए बड़े बम भी तैयार किये जाने लगे हैं, जो समाज के लिए खतरा है.
-फाल्गुनी पात्र, महासचिव, भाजपा, बैरकपुर जिला सांगठनिकD
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