राफेल पर क्यों चुप हैं सीएम : सुजन, राज्य में कांग्रेस के साथ मिल कर विरोध करने को तैयार माकपा

Updated at : 01 Nov 2018 2:40 AM (IST)
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राफेल पर क्यों चुप हैं सीएम : सुजन, राज्य में कांग्रेस के साथ मिल कर विरोध करने को तैयार माकपा

कोलकाता : माकपा ने मुख्यंमत्री ममता बनर्जी से सवाल किया कि राफेल के मुद्दे पर कांग्रेस सहित अन्य विरोधी पार्टियां केंद्र सरकार पर हमला बोल रही हैं, उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी क्यों इस मुद्दे पर चुप हैं. माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने विधानसभा में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सीएम […]

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कोलकाता : माकपा ने मुख्यंमत्री ममता बनर्जी से सवाल किया कि राफेल के मुद्दे पर कांग्रेस सहित अन्य विरोधी पार्टियां केंद्र सरकार पर हमला बोल रही हैं, उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी क्यों इस मुद्दे पर चुप हैं. माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने विधानसभा में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सीएम राफेल में भ्रष्टाचार के मामले पर क्यों खुल कर मोदी सरकार की आलोचना नहीं कर रही हैं.
उन्होंने सवाल किया कि कहीं सारधा व नारदा मामले में फंसी तृणमूल कांग्रेस केंद्र के मोदी सरकार के साथ समझौता नहीं कर ली है. श्री चक्रवर्ती ने कहा कि राफेल मुद्दे सहित सीबीआइ में भ्रष्टाचार सहित अन्य मामलों पर कांग्रेस, वामपंथी दल एकसाथ व अलग-अलग विरोध जुलूस निकाल रहे हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस इस मामले पर चुप है.
राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के साथ समझौता के बयान पर और राफेल मुद्दे पर कांग्रेस के साथ मिल कर आंदोलन करने के संबंध में श्री चक्रवर्ती ने कहा कि माकपा ने भी पहले भी सारधा और नारदा जैसे मुद्दे पर पृथक-पृथक रूप से और एक साथ भी विरोध प्रदर्शन किया है और राफेल मुद्दे पर भी कांग्रेस के साथ मिल कर आंदोलन को तैयार है.
श्री चक्रवर्ती ने बुधवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिख कर प्राथमिक शिक्षकों की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया. श्री चक्रवर्ती ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक अनशन कर रहे हैं. अनशन के दौरान ही उन्हें गिरफ्तार किया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एक विज्ञप्ति जारी कर प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए योग्यता बढ़ायी है, लेकिन योग्यता के अनुसार वेतन नहीं बढ़ाया गया है.
केंद्र सरकारी प्राथमिक शिक्षकों की तुलना में राज्य सरकारी प्राथमिक शिक्षकों के वेतन में काफी अंतर है. तत्काल उनका वेतन बढ़ाया जाये और उन्हें अन्य सुविधाएं दी जायें. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के रवैये से शिक्षकों को लगभग 25 हजार से 30 हजार करोड़ रुपये नुकसान हो रहा है.
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