यौनकर्मियों ने दुर्गापूजा के लिए मिट्टी देने से किया इंकार

Updated at : 26 Sep 2018 1:11 AM (IST)
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यौनकर्मियों ने दुर्गापूजा के लिए मिट्टी देने से किया इंकार

कोलकाता : महानगर के रेड लाइट एरिया सोनागाछी के यौनकर्मियों ने दुर्गापूजा के लिए अपने आंगन से मिट्टी दान करने का विरोध किया है. यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है. पिछले तीन साल से दुर्गापूजा के लिए यहां से मिट्टी देने से इनकार किया जाता रहा है. दरअसल, मान्यता के अनुसार एक वेश्यालय के […]

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कोलकाता : महानगर के रेड लाइट एरिया सोनागाछी के यौनकर्मियों ने दुर्गापूजा के लिए अपने आंगन से मिट्टी दान करने का विरोध किया है. यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है.
पिछले तीन साल से दुर्गापूजा के लिए यहां से मिट्टी देने से इनकार किया जाता रहा है. दरअसल, मान्यता के अनुसार एक वेश्यालय के आंगन से लायी गयी मिट्टी को दुर्गा पूजा के लिए शुभ माना जाता है. सेक्स वर्कर्स एसोसिएशन दुर्बार समन्वय कमिटी के मेंटर और सलाहकार भारती डे के अनुसार, यह निर्णय समाज की मुख्यधारा में सेक्स वर्कर्स की अस्वीकृति के विरोध में किया गया है.
उन्होंने कहा कि यौनकर्मियों को मुख्यधारा से न तो जुड़ने दिया जाता है और न ही सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है. ऐसे में यौनकर्मियों को समाज से निकाले जाने के विरोध स्वरूप उनकी ओर से पूजा के लिए मिट्टी न देने का फैसला किया गया है.
पुराण विशेषज्ञ नृसिम्हा प्रसाद भादुड़ी के अनुसार, अनुष्ठानों के लिए दशा मृतिका (दस जगह की मिट्टी) की आवश्यकता होती है, जो कि 10 विभिन्न स्थानों से लाई गई मिट्टी का मिश्रण होता है. वेश्यालय के अलावा, पहाड़ की चोटी, नदी के दोनों किनारों, बैल के सींगों, हाथी के दांत, सुअर की ऐंड़ी, दीमक के ढेर, किसी महल के मुख्य द्वार, किसी चौराहे और किसी बलिभूमि से भी मिट्टी लायी जाती है.
हालांकि कई दुकानों में पैक की गई दशा मृतिका मिलती है, लेकिन इसकी प्रामाणिकता के बारे में गंभीर संदेह हैं. यहां तक कि दुकान मालिक भी अपनी मिट्टी की प्रामाणिकता का दावा नहीं कर सकते.
भादुड़ी के अनुसार, 10 अलग-अलग स्थानों से मिट्टी का उपयोग करने की परंपरा वास्तव में पूजा में समाज के सभी क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी का प्रतीक है. इस बिंदु पर सुश्री भारती डे जोरदार आपत्ति दर्ज कराते हुए कहती हैं, ‘हमें मुख्यधारा के समाज में हमेशा से बहुत बुरी तरह अलग रखा गया है. तो अब वे शर्मनाक रीति-रिवाज क्यों कर रहे हैं. हम पूजा के लिए चुटकी भर मिट्टी भी नहीं दान करेंगे.’
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