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प्रदेश भाजपा के दिग्गजों पर नहीं है एतबार चुनाव जीतने बंगाल आयेंगे शाह के सिपहसालार

Updated at : 16 Sep 2018 6:36 AM (IST)
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प्रदेश भाजपा के दिग्गजों पर नहीं है एतबार  चुनाव जीतने बंगाल आयेंगे शाह के सिपहसालार

कोलकाता : प्रदेश भाजपा के नेताओं को लेकर पिछले दो दिनों से चल रही कार्यकारिणी की बैठक में दिलीप घोष ने साफ कहा कि बंगाल में पार्टी का जो जनाधार बढ़ रहा है, उसके बदौलत वह 25 सीट जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए बड़े नेताओं की जरूरत […]

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कोलकाता : प्रदेश भाजपा के नेताओं को लेकर पिछले दो दिनों से चल रही कार्यकारिणी की बैठक में दिलीप घोष ने साफ कहा कि बंगाल में पार्टी का जो जनाधार बढ़ रहा है, उसके बदौलत वह 25 सीट जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए बड़े नेताओं की जरूरत नहीं है. पार्टी ने गली-गली में नेता तैयार कर दिया है. इसलिए दिग्गजों की कोई जरूरत नहीं है. दिलीप घोष भले ही आत्मविश्वासी हों, लेकिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह किसी तरह की चूक बर्दास्त करने के पक्ष में नहीं हैं. इसके लिए वह बकायदा अपनी रणनीति बना कर अपने सिपहसलारों को पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में उतार रहे हैं.
मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश की कुल 42 लोकसभा सीटों के लिए अमित शाह ने खाका तय कर दिया है. उसके मुताबिक, हर लोकसभा केंद्र में केंद्र से तीस लोगों की टीम अपना काम अपने स्तर पर करेगी. स्थानीय नेताओं को उनके साथ तालमेल रख कर आगे बढ़ना होगा. यह बात पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं की बैठक में स्पष्ट कर दी है.
उन्होंने बताया कि राज्य नेतृत्व के साथ संपर्क रखते हुए चुनाव का गणित केंद्र बनायेगा और संचालित भी वह करेगा. रणनीति बनाने व विरोधियों के खिलाफ प्रचार का तरीका सबकुछ दिल्ली तय करेगा. यह सब अमित शाह के निर्देश पर चलेगा. कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव की कमान सीधे अमित शाह के हाथ में रहेगी. ऐसे में पार्टी के अंदर ही सवाल उठ रहा है कि सबकुछ वहीं से होगा तो प्रदेश के नेता दिलीप घोष, मुकुल राय और राहुल सिन्हा क्या करेंगे. यह सवाल कई लोगों ने कैलाश विजयवर्गीय से किया. इस पर उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार के खिलाफ लगातार एक के बाद एक मुद्दा पाने के बावजूद प्रदेश के नेता आंदोलनों की झड़ी नहीं लगा सके. ऐसे में उनके ऊपर सवाल उठना स्वाभाविक ही है.
अमित शाह की टीम में मैनेजमेंट के उस्ताद लोग रहेंगे तो स्थानीय नेताओं को भी तरजीह मिलेगी. कौन क्या कर रहा है, पार्टी ओर विरोधियों के प्रचार का तरीका क्या है. उसकी रिपोर्ट यह टीम सीधे दिल्ली भेजेगी. यह कौशल त्रिपुरा चुनाव में अपनाकर पार्टी सफल हुई थी. लिहाजा बंगाल भी बंग्लाभाषी लोगों की जमीन है. ऐसे में यह तरीका यहां लागू किया जा रहा है. इस कड़ी में एबीवीपी के नेता कौशल वर्मन की लैंडिंग बंगाल भाजपा में उपाध्यक्ष पद पर हो गयी है.
दिल्ली से उनको संगठन की देखरेख की जिम्मेवारी दी गयी है. उनकी रिर्पोटिंग भी सीधे दिल्ली को हो रही है. ऐसे में प्रदेश भाजपा के नेताओं को क्या करना है इसको लेकर वह लोग असमंजस में हैं. हालांकि कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि दिल और दिमाग लगाकर पार्टी हित में काम करें. नतीजे सुखद आयेंगे.
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