कोलकाता : बोर्ड गठन की सभा में शामिल होना विजयी प्रत्याशी का संवैधानिक अधिकार

Updated at : 30 Aug 2018 6:13 AM (IST)
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कोलकाता : बोर्ड गठन की सभा में शामिल होना विजयी प्रत्याशी का संवैधानिक अधिकार

हाईकोर्ट ने की टिप्पणी जज ने कहा : विजयी प्रत्याशी की ओर से या तो प्रिसाइडिंग ऑफिसर जाकर उनकी ओर से वोट देकर आयेंगे और एेसा न होने पर पुलिस को उन्हें सभा में लाना होगा कोलकाता : कलकत्ता हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव में हिस्सा लेना व बोर्ड गठन की […]

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हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
जज ने कहा : विजयी प्रत्याशी की ओर से या तो प्रिसाइडिंग ऑफिसर जाकर उनकी ओर से वोट देकर आयेंगे और एेसा न होने पर पुलिस को उन्हें सभा में लाना होगा
कोलकाता : कलकत्ता हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव में हिस्सा लेना व बोर्ड गठन की सभा में हिस्सा लेना एक विजेता उम्मीदवार का संवैधानिक अधिकार है. कलकत्ता हाइकोर्ट ने आमडांगा के बोदाई ग्राम पंचायत में गिरफ्तार हुए विजयी उम्मीदवार आलोक कहार की बोर्ड गठन की सभा में शामिल होने की अनुमति देने के मामले में यह कहा.
कलकत्ता हाइकोर्ट ने न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार ने कहा कि या तो प्रिसाइडिंग ऑफिसर जाकर उनकी ओर से वोट देकर आयेंगे और एेसा न होने पर पुलिस को उन्हें सभा में लाना होगा. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.
मामले की सुनवाई में याचिकाकर्ता आलोक काहार के पिता के वकील देवाशीष साहा ने कहा कि कहा कि नौकरी देने के नाम पर सहवास करने का झूठा आरोप भाजपा के विजयी उम्मीदवार आलोक कहार के खिलाफ लगाया गया है. राजनीतिक स्वार्थ के चलते उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है. 28 वर्षीय आलोक काहार भाजपा के टिकट पर विजयी हुए थे. वहां की 15 सीटों में से पांच पर तृणमूल को जीत मिली थी.
माकपा व निर्दलीय को चार-चार सीटें मिली थी. बोर्ड गठन के पहले वह उससे संबंधित सभा में हिस्सा न ले सके इसलिए उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया. इस संबंध में राज्य की ओर से कहा गया कि अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालत में खारिज कर दी गयी है. वहां बोर्ड गठन स्थगित रखा गया है. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अग्रिम जमानत की अर्जी दायर ही नहीं की गयी. बोर्ड गठन की सभा में हिस्सा लेने की मांग है.
दूसरी ओर पंचायत के बोर्ड गठन में सुरक्षा को लेकर जिस मामले की सुनवाई कलकत्ता हाइकोर्ट ने स्थगित की थी उसकी सुनवाई आगामी सितंबर महीने में न्यायाधीश तपोव्रत चक्रवर्ती ने तय किया है. भाजपा की ओर से कहा गया है कि भाजपा उम्मीदवारों को अपने सुरक्षा की चिंता है. उन्हें फोन पर धमकियां दी जा रही हैं. इसलिए सुरक्षा की मांग पर व शांतिपूर्ण तरीके से बोर्ड गठन के लिए वह अदालत पहुंचे हैं.
भाजपा का यह भी कहना है कि हर स्थान पर स्थिति भयावह है. पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, नदिया व उत्तर दिनाजपुर में मृतकों की संख्या सात और घायलों की संख्या 41 हो गयी है. राज्य की ओर से कहा गया कि जहां हिंसा हुई है वहां बोर्ड गठन को प्रशासन की ओर से स्थगित किया गया है.
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