ड्रोन व वाकी-टाकी पर असमंजस बरकरार
Updated at : 10 Aug 2018 4:30 AM (IST)
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कोलकाता : मंच के निर्माण को लेकर देर शाम भाजपा को अनुमित मिल गयी, लेकिन सभा में सुरक्षा कारणों से ड्रोन से निगरानी करने और वाकी-टाकी के इस्तेमाल को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति है. हालांकि पुलिस से सहयोग नहीं मिलते देख भारतीय जनता युवा मोर्चा ने सभा में सुरक्षा की जिम्मेवारी खुद ही […]
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कोलकाता : मंच के निर्माण को लेकर देर शाम भाजपा को अनुमित मिल गयी, लेकिन सभा में सुरक्षा कारणों से ड्रोन से निगरानी करने और वाकी-टाकी के इस्तेमाल को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति है. हालांकि पुलिस से सहयोग नहीं मिलते देख भारतीय जनता युवा मोर्चा ने सभा में सुरक्षा की जिम्मेवारी खुद ही उठाने का फैसला लिया है.
जानकारी के अनुसार ड्रोन और वाकी-टाकी के लिए आधिकारिक रूप से पुलिस से कोई अनुमति नहीं मांगी गयी है. यह दावा लालबाजार के सूत्र कर रहे हैं, जबकि भाजपा आवेदन की प्रतिलिपि दिखा रही है. हालांकि वाकी-टाकी या वायरलेस सेट के इंतजाम को लेकर कहा यह जा रहा है कि कई निजी संस्था है, जो सामाजिक कार्यों में लोगों के बीच संपर्क करने के लिए अपना सेट किराये पर देती हैं.
उनके पास इसका लाइसेंस होता है, जिसका लाभ भाजपा को मिल सकता है. लेकिन ड्रोन के मामले में कई दिशा-निर्देश हैं, इसलिए इसमें दिक्कत हो सकती है. अलबत्ता अमित शाह की सुरक्षा में जुड़ीं एजेंसियां इसका उपयोग करती हैं, तो कुछ कहा नहीं जा सकता. चूंकि भाजपा किसी भी तरह से खुद को तृणमूल कांग्रेस को टक्कर देने की दिशा में कमतर नही रखना चाहती.
इसलिए वह ड्रोन से निगरानी करने की बात कर रही है. क्योंकि शहीद दिवस की सभा में ममता बनर्जी के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस ने ड्रोन से निगरानी का इंतजाम कर रखा था. इसे टक्कर देने के लिए ही भाजपा ड्रोन का इस्तेमाल करना चाहती है.
अमित शाह को जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई है. इसके अलावा दिलीप घोष, राहुल सिन्हा, मुकुल राय व सांसद रूपा गांगुली को केंद्र की और से विशेष सुरक्षा मिली हुई है. हालांकि युवा मोर्चा की कार्यकारिणी की सभा में तय हुआ कि भाजपा का आइपीएस सेल सुरक्षा की जिम्मेवारी निभायेगा. उसके सहयोग के लिए 550 स्वंयसेवकों की टीम रहेगी, जो उनके निर्देश पर काम करेगी.
एक सौ स्वंयसेवकों के हाथों में वाकी-टाकी (वायरलेस सेट) रहेगा. जिससे वे सीधे संपर्क में रहेंगे. सभा का स्टेज पहले पार्क स्ट्रीट की तरफ बननेवाला था. बाद में तय हुआ कि गांधी मूर्ति के पास ही मंच बनाया जायेगा. इसकी देखरेख के लिए पीडब्ल्यूडी के पर भरोसा करने की बजाय पार्टी के सिविल इंजीनियरिंग के सदस्यों को भी लगाया जायेगा.
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