सुरक्षित आशियानों में बंगाल पहली पसंद
Updated at : 08 Aug 2018 2:37 AM (IST)
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कोलकाता : असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) प्रारूप सूची से बाहर किये गये 40 लाख लोगों में से भारतीय नागरिकता संबंधित कोई दस्तावेजवाले लोग अपने नये आशियानों की तलाश में आस-पड़ोस के राज्यों की ओर रुख किया है. दूसरी ओर, म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की तरह इन्हें पश्चिम बंगाल में बसाने की तैयारी शुरू […]
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कोलकाता : असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) प्रारूप सूची से बाहर किये गये 40 लाख लोगों में से भारतीय नागरिकता संबंधित कोई दस्तावेजवाले लोग अपने नये आशियानों की तलाश में आस-पड़ोस के राज्यों की ओर रुख किया है. दूसरी ओर, म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की तरह इन्हें पश्चिम बंगाल में बसाने की तैयारी शुरू हो गयी है.
खुफिया एजेंसियों ने इस संबंध में केंद्र सरकार को अगाह करते हुए बताया है कि असम से सटे बंगाल के जिलों में इन्हें बसाने की तैयारी चल रही है. राज्य के अलीपुरदुआर और कूचबिहार सहित अन्य क्षेत्रों के प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष निगरानी का निर्देश दिया गया है. दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस नेता इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं.
एनआरसी सूची से बाहर हुए लोगों में से जिनके पास राज्य सरकार की ओर से दिये गये नागरिकता प्रमाणपत्र हैं और वे एनआरसी में दर्ज नहीं हैं, वे सूची में आपना नाम जोड़वाने के लिए दोबारा अपील करने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन जिनके पास कोई भी सरकारी दस्तावेज नहीं है, वे पश्चिम बंगाल, मिजोरम और त्रिपुरा में अपना सुरक्षित आशियानों की तलाश में निकलने लगे हैं. येे करीब एक दशक पहले सीमा पार कर बांग्लादेश से असम में आये थे. सूत्रों के अनुसार पिछले तीन दिनों में करीब चार हजार लोग असम से निकल चुके हैं और बाकी असम छोड़ने की तैयारी में हैं.
गृह मंत्रालय के एक अाला अधिकारी (पूर्वोत्तर राज्यों के विशेषज्ञ) ने बताया कि इन लोगों की पहली पसंद पश्चिम बंगाल, मिजोरम व त्रिपुरा हैं, क्योंकि वे बांग्लादेशी है और इन राज्यों की सीमा से सटे इलाकों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं. इन तीनों राज्यों में वे खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे और उन्हें रोजी-रोटी मिलने में आसानी होगी. हालांकि त्रिपुरा जाने के लिए इन्हें लंबा रास्ता तय करना होगा, लेकिन मिजोरम और बंगाल पहुंचना इनके लिए मुश्किल नहीं है. इसलिए उक्त तीन राज्यों में से बंंगाल को वे अपना सबसे अधिक सुरक्षित आशियाना मान रहे हैं और वे असम से सटे बंगाल के अलीपुरदुआर और कूचबिहार जिलों में प्रवेश कर रहे हैं.
इनका दूसरा पसंदीदा राज्य मिजोरम है, जहां भी कुछ बांग्लादेशी घुसपैठिये जा रहे हैं. हालांकि उक्त अधिकारी ने बताया कि देर-सबेर इन लोगों को फिर से एनआरसी से गुजरना पड़ेगा
बारह साल पहले आये थे असम
असम के एक आइएएस अधिकारी के अनुसार इन दिनों जो असम से जो लोग बंगाल और मिजोरम जा रहे हैं, उनके पास भारतीय नागरिकता संबंधित किसी भी तरह का कोई दस्तावेज नहीं है. ये सभी पिछले 10-12 साल पहले ही अवैध तरीके से बांग्लादेश की सीमा पार कर भारत में आये थे और रोजगार की तलाश में वे असम गये और वहीं पर बस गये.
अलीपुरदुआर में बन रहा आशियाना
भारतीय जनता युवा मोर्चा के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष देवजीत सरकार ने आरोप लगाया कि असम से आनेवाले बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल सरकार अलीपुरदुआर में शिविर तैयार कर रही है. अलीपुरदुआर में हर साल बाढ़ पीड़ितों के लिए शिविर लगाये जाते हैं. लेकिन पिछले चार साल से क्षेत्र में बाढ़ नहीं आयी है, फिर भी वहां पर शिविर तैयार किये जा रहे हैं. यह असम से आनेवाले अवैध नागरिकों को ठहराने की तैयारी है.
इसके अलावा असम में एनआरसी सूची से बाहर किये गये लोगों को राज्य के जिलों में भी तैयार चल रही है. शिविर वहीं पर बनाये जा रहे हैं, जहां के पंचायत पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है, जिससे सरकार को असम से आनेवाले लोगों को वहां बसाने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है. देवजीत ने दावा किया कि उत्तर 24 परगना जिले के बारासात, दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर, बीरभूम और पुरलिया में भी इनके रहने लिए शिविर बना जा रहे हैं
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