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मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक खाते जब्त होंगे!

Updated at : 12 Jul 2018 12:41 AM (IST)
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मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक खाते जब्त होंगे!

रांची/कोलकाता : नवजातों को बेचने के मामले में झारखंड के डीजीपी ने गृह सचिव से मिशनरीज ऑफ चैरिटी के सभी बैंक खाते सीज करने को कहा है. जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में 5 संस्थाओं ने करोड़ों रुपये के विदेशी फंड स्वीकार किये हैं. विदेशी चंदा लेने के मामले की जांच सीबीआइ भी कर […]

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रांची/कोलकाता : नवजातों को बेचने के मामले में झारखंड के डीजीपी ने गृह सचिव से मिशनरीज ऑफ चैरिटी के सभी बैंक खाते सीज करने को कहा है. जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में 5 संस्थाओं ने करोड़ों रुपये के विदेशी फंड स्वीकार किये हैं. विदेशी चंदा लेने के मामले की जांच सीबीआइ भी कर सकती है. डीजीपी डीके पांडे ने इस मामले में राज्य के गृह सचिव को खत लिखकर संस्थाओं के बैंक खाते सीज करने को कहा है.
17 में से 6 शेल्टर होम पर नजर
वहीं, रांची में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के 17 शेल्टर होम में से छह में अनियमितताओं और अव्यवस्थाएं पायी गयी हैं. इन संस्थाओं में बदतर रखरखाव, कमजोर सुरक्षा व्यवस्था, फर्जी पंजीकरण जैसी शिकायतें देखने को मिली हैं. ये छह शेल्टर होम प्रेमाश्रय, बालाश्रय, नारी निकेतन, दिव्य सेवा संस्थान, समाधान और आदिम जाति सेवा मंडल हैं.बच्चों को बेचने के मामले की जांच 22 जून को शुरू होने के बाद शोल्टर होम को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत लाने का फैसला किया गया था.
इस मामले का पता लगाने वाली रांची चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की चेयरपर्सन रूपा वर्मा ने कहा कि गिरफ्तार हुई सिस्टर्स ने बताया है कि उन्होंने चार बच्चों को बेचा है. इनमें से दो बच्चों को बरामद कर लिया गया है और वे सीडब्ल्यूसी की कस्टडी में हैं.
हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें 450 बच्चों की संख्या के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है, जिसकी चर्चा मीडिया में हो रही है. इसके साथ ही निर्मल हृदय शेल्टर होम से 30 गर्भवती महिलाओं को भी कस्टडी में लिया गया है.
रूपा वर्मा ने बताया कि शिशु भवन से 22 बच्चों को भी कस्टडी में लिया गया है. ये सभी बच्चे 2 साल से कम उम्र के हैं. उन्होंने कहा कि इन सभी बच्चों को उनके (जैविक) परिजनों को सौंपने के लिए उनकी तलाश की जा रही है.
मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े होम्स में 2015 से 2018 के बीच 450 गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराया गया था. लेकिन उनमें से सिर्फ 170 नवजात शिशुओं का ही डिलिवरी रिकॉर्ड मिला. बाकी 280 के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला.
क्या है पूरा मामला
यह मामला तब सामने आया था जब इस साल मई में मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े होम से एक नवजात शिशु को एक दंपती ने 1.20 लाख रुपये में लिया था. इस दंपती से नवजात के जन्म और चिकित्सा देखभाल के नाम पर ये रकम ली गयी थी. दंपती का आरोप है कि चैरिटी संस्थान की ओर से ये आश्वासन देकर बच्चा वापस ले लिया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चा लौटा दिया जायेगा. जब बच्चा वापस नहीं मिला तो दंपती ने इसकी शिकायत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से कर दी.
नवजातों की बिक्री के आरोप को लेकर पुलिस ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित होम की एक कर्मचारी अनिमा इंद्रवार और सिस्टर कोंसीलिया को गिरफ्तार कर लिया. दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. पुलिस इनसे आगे पूछताछ के रिमांड पर लेने के लिए अर्जी देगी.
क्या दान लेना और गरीबों की सेवा करना अपराध है : मिशनरीज
कोलकाता. बैंक खाते सीज करने व विदेशी फंडिंग के आरोप पर मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि क्या दान लेना अपराध है और एक विशेष धर्म के लोगों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? मिशनरीज ऑफ चैरिटी मुख्यालय की प्रवक्ता सिस्टर सुनीता कुमार ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कहा : झारखंड के मामले में मिशनरीज पूरे मामले की खुद अपनी तरफ से जांच कर रही है. ऐसी स्थिति में इस तरह का सवाल उठाने से क्या फायदा है.
यदि कोई डोनेशन देता है, तो इससे किसी अन्य का क्या लेना-देना है. यदि कोई दान देना चाहता है और गरीबों के कल्याण के लिए वे लोग दान ले रहे हैं, तो इससे किसी का क्या लेना-देना हो सकता है. क्या दान लेना या गरीबों की सेवा करना अपराध है. कोई पांच डॉलर देता है, तो कोई 50 डॉलर दान देता है. वे लोग गरीबों की सेवा के लिए उसे स्वीकार करते हैं.
उन्होंने कहा कि वह नहीं कहती हैं कि कानून अपना काम नहीं करें. यदि कुछ गलत हुआ है, तो कानून अपना काम करें, लेकिन अभी भी विश्वास नहीं हो पा रहा है कि वास्तव में ऐसा कुछ हुआ भी है. उन्होंने कहा कि मिशनरीज ने तीन साल पहले ही बच्चों को गोद देना बंद कर दिया था और गोद लेने के लिए माता-पिता से कभी भी धन नहीं मांगा है. उन्होंने कहा कि सारी सच्चाई समय के साथ सामने आ जायेगी और दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा.
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