गारमेंट्स बायर्स-सेलर्स मीट महज छलावा

Updated at : 29 Jun 2018 2:47 AM (IST)
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गारमेंट्स बायर्स-सेलर्स मीट महज छलावा

कोलकाता : बायर्स और सेलर्स यानी सीधे तौर पर खरीदारों और बिक्रेताओं के मिलने के लिए मीट का आयोजन किया जाता है, लेकिन कहीं न कहीं यह बस नाम का ही रह जाता है और दलाल राज बढ़ता है क्योेंकि बुधवार को वेस्ट बंगाल गारमेंट्स मैन्यूफेक्चरर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय […]

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कोलकाता : बायर्स और सेलर्स यानी सीधे तौर पर खरीदारों और बिक्रेताओं के मिलने के लिए मीट का आयोजन किया जाता है, लेकिन कहीं न कहीं यह बस नाम का ही रह जाता है और दलाल राज बढ़ता है क्योेंकि बुधवार को वेस्ट बंगाल गारमेंट्स मैन्यूफेक्चरर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय 46वीं गारमेंट्स बॉयर्स एंड सेलर्स मीट के उद्घाटन समारोह में दिल्ली से आये एक विजिटर्स व्यवसायी पंकज कपूर ने साफ तौर पर खुलासा किया कि ऐसे ट्रेड फेयरों से दलालों को बढ़ावा मिलता है.
उन्होंने कहा कि मैं तीसरी बार इस तरह की सम्मेलन में आया हूं. ऐसे ट्रेड फेयर जो बॉयर्स और सेलर की सुविधाओं के लिए रखा जाता है, यह सही बात है कि वे एक जगह मिल कर विभिन्न ब्रांडों को आसानी से देख सकते हैं लेकिन इससे दलालों के वर्चस्व को बढ़ावा मिलता है क्योंकि दिल्ली से आया व्यवसायी डॉयरेक्ट तो पैसा देगा नहीं और दिया भी तो अगर पैसा डूब गया तो उसकी गारेंटी कौन लेगा.
उसने बताया कि अगर व्यवसायी के तौर पर वह पैमेंट कर भी दिया और मॉल समय पर नहीं पहुंचा, तो उसे रिकवर करने के लिए बार-बार आना-जाना पड़ेगा इसलिए लोग मीडिएटर के तौर पर दलालों का चयन करते हैं और उनका दायित्व रहता है, वे आसानी से मॉलों के ऑर्डर के मुताबिक पैसा अपनी ओर से देकर व्यवसायी तक मॉल सप्लाई कर देते हैं. इसमें सीधी जिम्मेवारी उस ब्रोकर पर रहती है और व्यवसायियों को भी सुविधाएं होती हैं. इसलिए सुविधा के लिए ही लोग दलालों का चयन करते हैं और इससे बीच वाले दलालों का राज व कारोबार बढ़ जाता है.
रही बात रूझान की तो अब बंगाल हो या कोई भी राज्य, हर जगह ऐसे आयोजन हो रहे हैं, ऐसे में अब व्यवसायियों का रूझान कम होने लगा है. वहीं एक और कंपनी के व्यवसायी ने कहा कि इस साल कम रूझान दिखा है क्योंकि शीत के कपड़ो के लिए यह फेयर रखा गया है. उन्होंने बताया कि हर बार शीत के सीजन के पूर्व रखे जानेवाले फेयर में इसी तरह से कम लोग रुचि रखते हैं.
वहीं बड़ाबाजार के एक व्यवसायी ने बताया कि इस बार अपने ब्रांड की ब्रांडिग के लिए इस एसोसिएशन के छत के नीचे आया हूं, अगर मुनाफा दिखा तो अगले बार फिर पार्टिसिपेंट के तौर पर शामिल होंगे और अगर नुकसान हुआ तो फिर नहीं आयेंगे. एक कंपनी के व्यवसायी ने बताया कि इस फेयर से ज्यादातर बाहर के व्यवसायियों का मुनाफा होता है. इस फेयर में अधिकांश बाहरी व्यवसायी आते हैं.
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