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71 फीसदी अभिभावक रोकते हैं बच्चों को

कोलकाता. कोलकाता के 71‍ फीसदी अभिभावक अपने बच्चों के बीमार होने के डर से उन्हें पसंदीदा भोजन खाने से अथवा बाहर जाकर खेलने से रोकते हैं. डॉ बत्रा होम्योपैथी द्वारा नियुक्त एक प्रमुख अनुसंधान फर्म, कांतर आइएमआरबी द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है. कांतर आइएमआरबी द्वारा भारत के आठ प्रमुख शहरों […]

कोलकाता. कोलकाता के 71‍ फीसदी अभिभावक अपने बच्चों के बीमार होने के डर से उन्हें पसंदीदा भोजन खाने से अथवा बाहर जाकर खेलने से रोकते हैं. डॉ बत्रा होम्योपैथी द्वारा नियुक्त एक प्रमुख अनुसंधान फर्म, कांतर आइएमआरबी द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है. कांतर आइएमआरबी द्वारा भारत के आठ प्रमुख शहरों में इस सर्वेक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें सामाजिक-आर्थिक वर्ग ए एवं बी से संबंधित 1,617 उत्तरदाताओं (माता या पिता) को शामिल किया, जिनके बच्चों की आयु दो से 10 वर्ष के बीच है.
सर्वेक्षण के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल परिवारों के 73 फीसदी बच्चे हर तीन महीने में कम से कम एक बार बीमार अवश्य पड़ते हैं, जिसे देखते हुए माता-पिता अपने बच्चों को आइसक्रीम, चॉकलेट, पेस्ट्री, कोल्ड ड्रिंक्स, इत्यादि का सेवन करने से रोकते हैं क्योंकि उन्हें सर्दी और खांसी होने का डर सताता है. माता-पिता अपने बच्चों को घर के बाहर मौजूद धूल / प्रदूषण से होने वाली एलर्जी से बचाने तथा दूसरे बच्चों के साथ खेलने के दौरान संक्रमण होने के भय से, अपने बच्चों को बाहर खेलने जाने से रोकते हैं.

सर्वेक्षण के अनुसार कोलकाता की स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि बीमारी के कारण लगभग 36 फीसदी बच्चों को कम से कम 10 दिनों के लिए स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ती है. सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि 36 फीसदी बच्चों को विद्यालय 10-15 दिनों के लिए स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ती है, जो अन्य महानगरों की तुलना में सबसे ज्यादा है.
सर्वेक्षण में कहा गया है कि, इस स्थिति के लिए सर्दी और खांसी 77 फीसदी तथा बुखार 71 फीसदी जिम्मेदार है – जो कोलकाता में होने वाली सबसे आम बीमारियां हैं. इसके साथ-साथ शहर में श्वसन तंत्र संक्रमण 33 फीसदी (राष्ट्रीय औसत 27 फीसदी है) है, जबकि टॉन्सिलिटिस 27 फीसदी (राष्ट्रीय औसत 20 फीसदी है), तथा 33 फीसदी बच्चों को त्वचा संबंधी समस्याएं हैं जो भारत के किसी भी अन्य शहर से अधिक है. इसके अलावा, कोलकाता में 32 फीसदी बच्चों का वजन सामान्य से कम है, और यह प्रतिशत अन्य महानगरों की तुलना में सबसे ज्यादा है. इस शहर में सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त बच्चों की संख्या सबसे अधिक, अर्थात 26 फीसदी है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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