संपत्ति कर वसूली में केएमसी के लिए बेहतर रहा 2025

घाटे से जूझ रहे कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के लिए साल 2025 संपत्ति कर वसूली के लिहाज से उत्साहजनक रहा है. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से 31 दिसंबर की अवधि के दौरान निगम ने 1042.17 करोड़ रुपये का संपत्ति कर वसूला है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में वसूले गये 1009.66 करोड़ रुपये की तुलना में 3.22 प्रतिशत अधिक है.
कोलकाता.
घाटे से जूझ रहे कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के लिए साल 2025 संपत्ति कर वसूली के लिहाज से उत्साहजनक रहा है. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से 31 दिसंबर की अवधि के दौरान निगम ने 1042.17 करोड़ रुपये का संपत्ति कर वसूला है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में वसूले गये 1009.66 करोड़ रुपये की तुलना में 3.22 प्रतिशत अधिक है. निगम के संपत्ति कर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक संपत्ति कर संग्रह में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर बकायेदार करदाता वित्तीय वर्ष के अंतिम दो महीनों में कर भुगतान करते हैं, क्योंकि इस दौरान निगम की ओर से वसूली को लेकर सख्ती बढ़ा दी जाती है.संपत्ति कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सबसे अधिक वृद्धि जोका यूनिट में दर्ज की गयी है, जहां कर संग्रह में 15.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. जोका यूनिट ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर तक 42.50 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 36.73 करोड़ रुपये था. असेसमेंट विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस उल्लेखनीय वृद्धि का मुख्य कारण गैर-मूल्यांकित संपत्तियों को चिह्नित कर उन्हें कर दायरे में लाना है.निगम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, साउथ सबर्बन यूनिट (एसएसयू) -जिसमें बेहाला इलाका शामिल है-से चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में 62.56 करोड़ रुपये की वसूली हुई है. पिछले वित्त वर्ष इसी अवधि में यह वसूली 55.20 करोड़ रुपये थी, यानी 13.34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी.वहीं, बोरो नंबर 11 में भी पिछले वर्ष की तुलना में अप्रैल से 31 दिसंबर तक 8.95 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. संपत्ति कर वसूली के लिए निगम में कुल आठ यूनिट कार्यरत हैं. इनमें साउथ यूनिट का प्रदर्शन भी संतोषजनक रहा है. चालू वित्त वर्ष में इस यूनिट से अप्रैल से दिसंबर तक 428.36 करोड़ रुपये की वसूली हुई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष इसी अवधि में 423.42 करोड़ रुपये वसूले गये थे. यह 1.16 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
इसके विपरीत, नॉर्थ यूनिट का कलेक्शन 243.60 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 244.77 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है. वहीं गार्डन रीच यूनिट में 17.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. इस संबंध में निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कर वसूली विभाग पूरे वर्ष बकाया संपत्ति कर वसूलने का प्रयास करता है, लेकिन कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान भुगतान में टालमटोल करते हैं. उन्होंने कहा कि जैसे ही निगम की ओर से ‘डिस्ट्रेस वारंट’ जारी किया जाता है, अधिकांश करदाता भुगतान कर देते हैं. अधिकारी ने बताया कि भविष्य में ऐसे वारंटों पर और जोर दिया जायेगा, जिससे अंतिम तिमाही में कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है. निगम बकाया रखने वाली व्यावसायिक संपत्तियों को सील भी करता है. यह अंतिम चेतावनी होती है, इसके बाद निगम संपत्ति जब्त कर उसकी बिक्री के जरिए बकाया वसूलने की कार्रवाई करता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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