ePaper

पेट में पल रहे बच्चे की बीमारी की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने मां को दी गर्भपात की अनुमति

Updated at : 03 Jul 2017 3:39 PM (IST)
विज्ञापन
पेट में पल रहे बच्चे की बीमारी की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने मां को दी गर्भपात की अनुमति

नयीदिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने एक महिला को 26 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात कराने की आज अनुमति प्रदान कर दी क्योंकि उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण दिल की गंभीर बीमारियों से ग्रसित है. न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि कोलकाता में एसएसकेएम अस्पताल में […]

विज्ञापन

नयीदिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने एक महिला को 26 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात कराने की आज अनुमति प्रदान कर दी क्योंकि उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण दिल की गंभीर बीमारियों से ग्रसित है.

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि कोलकाता में एसएसकेएम अस्पताल में इस गर्भ के समापन की प्रक्रिया ‘तुरंत’ की जानी चाहिए.

पीठ ने मेडिकल बोर्ड और एसएसकेएम अस्पताल की रिपोर्ट के अवलोकन के बाद यह निर्देश दिया जिसमे गर्भपात की सलाह देतेहुए कहा गया था कि गर्भावस्था जारी रखने से मां को ‘गंभीर मानसिक आघात ‘ पहुंच सकता है और बच्चे ने, यदि जीवित जन्म लिया, तो उसे दिल की बीमारियों के लिए अनेक सर्जरी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा.

पीठ ने कहा, ‘ ‘मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मद्देनजर हम यह अनुरोध स्वीकार करते हैं और महिला के गर्भ का चिकित्सीय प्रक्रिया से समापन करने का निर्देश देते हैं. ‘ ‘ इस महिला और उसके पति ने गर्भ में पल रहे भ्रूण की अनेक विसंगतियों का जिक्र करते हुए गर्भपात की अनुमति केलिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. इस दंपती ने इसके साथ ही गर्भ का चिकित्सीय समापन कानून, की धारा 3 :2: :बी: की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है जिसमें 20 सप्ताह के बाद भ्रूण का गर्भपात करने पर प्रतिबंध है.

शीर्ष अदालत ने इससे पहले उसके निर्देश पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित सात सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट रिकार्ड में ली और महिला से कहा कि वह अपने स्वास्थ्य के बारे में इसका अवलोकन कर अपने दृष्टिकोण से उसे अवगत कराये.

न्यायालय ने 23 जून को एसएसकेएम अस्पताल के सात चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित करके महिला और उसके 24 सप्ताह के गर्भ के स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं का पता लगाकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था.इसदंपती ने अपनी याचिका के साथ एक मेडिकल रिपोर्ट भी संलग्न की थी जिसमें यह सुझाव दिया गया था कि भ्रूण में गंभीर विसंगतियां हैं और यदि इसे जन्म लेने की अनुमति दी गयी तो यह बच्चे और मां दोनों केलिए ही घातक हो सकता है.

इसके बाद ही न्यायालय ने 21 जून को केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार से उसकी याचिका पर जवाब मांगा था.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola