सिंगूर अस्पताल में अवैध यूएसजी, लाॅकेट ने उठाये सवाल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 May 2024 1:41 AM
सिंगूर ग्रामीण अस्पताल में पीपीपी मॉडल के तहत चल रहे एक लैब में बिना लाइसेंस के और पुराने उपकरणों के साथ महिलाओं का यूएसजी (अल्ट्रासाउंड) किये जाने के आरोप लगे हैं.
हुगली . सिंगूर ग्रामीण अस्पताल में पीपीपी मॉडल के तहत चल रहे एक लैब में बिना लाइसेंस के और पुराने उपकरणों के साथ महिलाओं का यूएसजी (अल्ट्रासाउंड) किये जाने के आरोप लगे हैं. हुगली लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अस्पताल में हो रहे यूएसजी को बंद करवा दिया. चुनाव प्रचार के दौरान सिंगूर पहुंचीं लॉकेट चटर्जी ने अचानक अस्पताल का निरीक्षण किया. उन्होंने आरोप लगाया कि गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए जो मशीन इस्तेमाल की जा रही है, वह 2017 में ही एक्सपायर हो गयी थी. उन्होंने कहा कि 2022 में इस मशीन का लाइसेंस रिन्यू होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे साफ है कि अस्पताल में गैरकानूनी तरीके से यूएसजी किया जा रहा था. लॉकेट चटर्जी ने लैब के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से सीधे सवाल किया कि वे कैसे इस तरह के उपकरण का उपयोग कर रहे हैं. चिकित्सक ने माना कि मशीन की रिपोर्ट में कई बार गड़बड़ हुई है. अस्पताल ने इस बारे में जिला स्वास्थ्य विभाग को सूचित भी किया था. डॉक्टर अर्पिता मुखर्जी ने कहा कि कई बार रिपोर्ट में रोगी सामान्य दिखता है, लेकिन फिर भी उसे कुछ समस्या हो सकती है. इस कारण वे दूसरी राय के लिए रोगियों को बाहर रेफर कर देते थे. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि मशीन पुरानी है और 2017 में एक्सपायर हो चुकी है. लॉकेट चटर्जी ने कहा कि वह थाने में शिकायत दर्ज करायेंगी और जो लोग जान-बूझकर गैरकानूनी तरीके से काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगी. उन्होंने मानस नियोगी का नाम लेते हुए कहा कि वह लाइसेंस रिन्यू कराने में विफल रहे थे और इस मामले में पैसे के लेन-देन की भी जांच की जायेगी. वहीं, हुगली के जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी, मृगांक मौलिक ने कहा कि मशीन का एक्सपायर होने जैसा कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन लाइसेंस को हर पांच साल में रिन्यू करना आवश्यक है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ है, तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठायेंगे. इस घटना से सिंगूर ग्रामीण अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और नियम अनुपालन पर सवाल उठ रहे हैं.
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