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पश्चिम बंगाल : हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में सौतेले पिता का नाम शामिल करने का दिया आदेश

Updated at : 08 Mar 2024 6:02 PM (IST)
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पश्चिम बंगाल : हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में सौतेले पिता का नाम शामिल करने का दिया आदेश

पश्चिम बंगाल : न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि समाज में आ रहे बदलावों के साथ कानून में भी उसके अनुसार नरमी लाने की आवश्यकता है. कानून का प्रयोग लोगों के हित में होना चाहिए. जो मामले वृहत्तर जनजीवन से जुड़े नहीं हैं, वहां कानूनी जटिलताओं को कम से कम किया जाना चाहिए.

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र (Birth certificate) में पिता का नाम बदलने का आदेश दिया है. अदालत ने संबंधित नगरपालिका को जन्म प्रमाणपत्र से जैविक पिता का नाम हटाकर सौतेले पिता के नाम के साथ नए सिरे से जारी करने को कहा है. न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि समाज में आ रहे बदलावों के साथ कानून में भी उसके अनुसार नरमी लाने की आवश्यकता है. कानून का प्रयोग लोगों के हित में होना चाहिए. जो मामले वृहत्तर जनजीवन से जुड़े नहीं हैं, वहां कानूनी जटिलताओं को कम से कम किया जाना चाहिए.

क्या है मामला

नदिया जिले के नवद्वीप में एक महिला ने अपने बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र से उसके जैविक पिता का नाम हटाकर सौतेले पिता का नाम शामिल करने का संबंधित नपा से अनुरोध किया था, जिसपर नगरपालिका ने जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े कानून का हवाला देते हुए कहा था कि एक बार पिता के नाम के साथ जन्म प्रमाणपत्र जारी हो जाने के बाद उसमें किसी तरह का संशोधन नहीं किया जा सकता. महिला ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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क्या कहा न्यायाधीश ने

उक्त महिला की 2021 में जिस व्यक्ति से शादी हुई थी, उससे उन्हें एक पुत्र है. बाद में दोनों का तलाक हो जाने के बाद महिला ने फिर से शादी कर ली. वर्तमान पति ने उनके बेटे को अपनाया है और उसे अपना नाम देने को तैयार हैं, जिसके बाद महिला ने नपा में अर्जी लगाई थी. न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने अपने पर्यवेक्षण में कहा कि अभी बच्चे की जो उम्र है, उसमें अभी उसे अपने जैविक व सौतेले पिता में अंतर समझ नहीं आएगा. वह सौतेले पिता को ही जैविक पिता मानकर बड़ा होगा.बाद में जब वह अपने जन्म प्रमाणपत्र में किसी और का नाम अपने पिता की जगह देखेगा तो इससे काफी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं और सौतेले पिता के साथ उसके संबंध भी बिगड़ सकते हैं. न्यायाधीश ने हालांकि इसके साथ यह भी स्पष्ट किया कि जन्म प्रमाणपत्र से जैविक पिता का नाम हटने पर भी उनकी संपत्ति पर बेटे का अधिकार क्षीण नहीं होगा.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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