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सरकारी शिक्षक शैक्षणिक योग्यता सहित सभी दस्तावेज पोर्टल पर डालें

Updated at : 20 Jun 2024 11:45 PM (IST)
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सरकारी शिक्षक शैक्षणिक योग्यता सहित सभी दस्तावेज पोर्टल पर डालें

शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश विश्वजीत बसु ने बुधवार को महत्वपूर्ण आदेश दिया. न्यायाधीश ने अगले दो सप्ताह के भीतर राज्य के शिक्षा विभाग को सभी सरकारी स्कूल के शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता सहित सभी दस्तावेज सरकारी पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया.

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कोलकाता.

शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश विश्वजीत बसु ने बुधवार को महत्वपूर्ण आदेश दिया. न्यायाधीश ने अगले दो सप्ताह के भीतर राज्य के शिक्षा विभाग को सभी सरकारी स्कूल के शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता सहित सभी दस्तावेज सरकारी पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया. कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विश्वजीत बसु ने राज्य में कार्यरत कुल 1,61,683 शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता सहित अन्य जानकारियों को बांग्ला शिक्षा पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि छात्रों के माता-पिता को स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता के बारे में पता होना चाहिए. शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद राज्य में शिक्षकों की योग्यता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सवाल उठाये हैं.

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्रों के माता-पिता को पता होना चाहिए कि स्कूल शिक्षक जिस विषय को पढ़ा रहा है, उसमें उसकी योग्यता क्या है. क्योंकि ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि कई शिक्षक योग्य नहीं हैं, लेकिन वे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं. इसके लिए राज्य को प्रत्येक शिक्षक की योग्यता सरकारी पोर्टल पर अपलोड करनी चाहिए.

इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता विश्वब्रत बसु मल्लिक ने दलील दी कि राज्य के सभी स्कूल शिक्षकों का डेटा इकट्ठा करने में दो महीने और लगेंगे. राज्य के वकील ने हुगली, बीरभूम और नदिया जिलों की रिपोर्ट न्यायाधीश को सौंपी. लेकिन न्यायाधीश ने दो महीने का समय देने से इनकार कर दिया और राज्य सरकार को दो सप्ताह के अंदर आदेश का पालन करने के लिए कहा. न्यायाधीश ने कहा कि राज्य शिक्षक नियुक्ति के भ्रष्टाचार से संबंधित सभी मामलों में इतना उदासीन क्यों है? न्यायाधीश ने यह भी कहा कि हमें और तेजी से कार्रवाई करनी होगी. कई शिक्षक चार से पांच साल से सेवा में हैं, लेकिन आरोप है कि उन्हें कोई नियुक्ति पत्र नहीं मिला है. इसलिए अब इसमें देरी नहीं की जा सकती. हर किसी को यह जानना होगा कि स्कूल में कौन काम कर रहा है.गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद के गोथा हाइस्कूल में शिक्षक की अवैध नियुक्ति के बाद यह मामला सामने आया है. उक्त स्कूल में बिना नियुक्ति पत्र के ही एक शिक्षक कई वर्षों से काम कर रहा था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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