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भू-माफिया का बढ़ता दबदबा आसनसोल के लिए खतरनाक, कल-कारखाने हुए बंद, कोयला उद्योग में निजीकरण से रोजगार संकट

Updated at : 10 Mar 2024 1:34 PM (IST)
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asansol industrial area

आसनसोल लोकसभा सीट पर अब तक नहीं जीती कोई महिला प्रत्याशी.

आसनसोल लोकसभा क्षेत्र इलाका प्राकृतिक व खनिज संपदा से भरपूर है. जिसके कारण यहां एक के बाद एक उद्योग लगे और आसनसोल के विकास को गति मिली. जिसके कारण इसे शिल्पांचल के रूप में भी जाना जाता है. देश का पहला कोयला खदान इसी क्षेत्र के रानीगंज में शुरू हुआ था. कोयला खदानों की भरमार […]

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आसनसोल लोकसभा क्षेत्र इलाका प्राकृतिक व खनिज संपदा से भरपूर है. जिसके कारण यहां एक के बाद एक उद्योग लगे और आसनसोल के विकास को गति मिली. जिसके कारण इसे शिल्पांचल के रूप में भी जाना जाता है. देश का पहला कोयला खदान इसी क्षेत्र के रानीगंज में शुरू हुआ था. कोयला खदानों की भरमार के कारण इसे कोयलांचल की संज्ञा भी दी गयी है.

आसनसोल में बंद हो गईं सरकारी संस्थाएं

हाल के वर्षों में यहां अनेकों बड़े सरकारी उद्योग हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड, बर्न स्टैंडर्ड जैसी संस्थाएं बंद हुई. कोयला उद्योगों का निजीकरण हो रहा है. जिससे रोजगार की संभावना सिमट रही है. श्रमिक संगठन इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन कर रहा है. चित्तरंजन रेलइंजन कारखाना उत्पादन इकाई के बजाय, असेंबल यूनिट बन गयी है. श्रमिकों की बहाली लगभग बंद ही चुकी है. श्रमिकों का आंदोलन जारी है. अनेकों निजी उद्योग बंद हुए.

औद्योगिक नगरी में बढ़ा रोजगार का संकट

नये उद्योगों की स्थापना नहीं के बराबर है. औद्योगिक नगरी में उद्योगों का बंद होना और इलाके की आबादी में लगातार बढ़ोतरी से रोजगार को लेकर भयंकर समस्या उत्पन्न हो रही है, जो आगामी दिनों में और भी ज्यादा बढ़ेगी. आसनसोल संसदीय क्षेत्र के लिए यह एक विकराल समस्या बनती जा रही है.

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बढ़ रहा भू-माफिया का कब्जा

हाल के दिनों में भू-माफियाओं के दबदबा काफी बढ़ता जा रहा है. प्रशासन भी उनके आगे बेबस है. निजी जमीनों के अलावा सरकारी जमीनों पर भी कब्जा करने का अनेकों मामले सामने आया है. सरकारी जमीनों को धड़ल्ले से बेचा गया, चाहे वह केंद्र की हो या राज्य सरकार की. आगामी दिनों में यह एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आनेवाली है. भूमि विभाग में जमीन का रिकॉर्ड प्राप्त करना कठिन चुनौती का कार्य बन गया है. पेयजल को लेकर समस्या बरकरार है.

आसनसोल में पेयजल बड़ी समस्या

आसनसोल लोकसभा क्षेत्र सहित जिला के सभी इलाकों के पेयजल एक बड़ी समस्या है. ठंडी के दिनों में भी पानी के लिए लोगों का आंदोलन होता रहता है. हर घर नल परियोजना के तहत कार्य तेजी से चल रहा है. वर्ष 2027 तक समस्या का समाधान होने की उम्मीद है. अनेकों जगह यह परियोजना भी सिर्फ कागजों में पूरा दिख रहा है. इस मुद्दे पर भी लोगों का लगातार आंदोलन हो रहा है. ग्रामीण अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की हालत काफी खराब है, जिससे स्वास्थ्य परिसेवा का सही लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा है.

बस सेवा भी हुई प्रभावित

परिवहन परिसेवा की हालत काफी दयनीय है. ऑटो, टोटो की बढ़ती संख्या के कारण अनेकों रूटों पर बस परिसेवा प्रभावित हुई है और बंद है. यहां हिंदी भाषी हिन्दू और उर्दू भाषी मुस्लिम की आबादी बहुमत में होने के बावजूद भी काजी नजरुल विश्वविद्यालय में इन दो समुदायों के छात्रों की भागीदारी 10 फीसदी से भी कम है. 150 हिंदी और उर्दू माध्यम हाइस्कूल होने के बावजूद उच्च शिक्षा के अभाव में यहां के छात्रों का पलायन जारी है.

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आज तक कोई महिला नहीं बनी सांसद

अभी दो दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की धूम मची थी. जगह-जगह महिलाओं का सम्मान हुआ. पुरस्कार व उपहार दिये गये. इसमें दो राय नहीं कि महिलाओं के प्रति समाज व सरकार, दोनों के रुख-रवैये में हाल के वर्षों में व्यापक परिवर्तन हुआ है. इसके बावजूद आसनसोल लोकसभा क्षेत्र ने आज तक किसी महिला को अपना प्रतिनिधि बना कर संसद नहीं भेजा.

महिला उम्मीदवारों को आसनसोल ने किया खारिज

ऐसा भी नहीं कि इस क्षेत्र के प्रतिनिधित्व में महिलाओं ने रुचि नहीं ली. चुनाव के मैदान में उतरीं जरूर, पर इन महिला प्रत्याशियों को हर बार आसनसोल के मतदाताओं ने खारिज कर दिया. इस सीट के साथ खास यह है कि एक उपचुनाव समेत हाल के तीन संसदीय चुनावों यहां ठीकठाक कद की महिला उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी ठोकी. पर तीनों को मतदाताओं ने वापस घर को भेज दिया.

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मुनमुन सेन हों या अग्निपाल मित्रा, कोई न जीत सकीं

पिछली बार 2022 में यहां के सांसद बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में मौजूदा विधायक अग्निमित्रा पाल भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरीं, पर कामयाब नहीं हो सकीं. इससे पहले 2019 में भाजपा के बाबुल सुप्रियो के सामने खड़ी तृणमूल प्रत्याशी सिने तारिका मुनमुन सेन को हारना पड़ा था. 2014 के चुनाव में भी तृणमूल की ही दोला सेन को भी भाजपा उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो ने परास्त किया था.

किस विधानसभा से किस पार्टी का विधायक

पांडवेश्वर नरेंद्रनाथ चक्रवर्तीतृणमूल कांग्रेस
रानीगंजतापस बनर्जीतृणमूल कांग्रेस
जामुड़ियाहरेराम सिंहतृणमूल कांग्रेस
आसनसोल दक्षिणअग्निमित्रा पालभारतीय जनता पार्टी
आसनसोल उत्तरमलय घटकतृणमूल कांग्रेस
कुल्टीडॉ अजय पोद्दारभारतीय जनता पार्टी
बाराबनीविधान उपाध्याय तृणमूल कांग्रेस

मतदाताओं का आंकड़ा

  • कुल मतदाता : 17,64,814
  • पुरुष मतदाता : 9,00,869
  • महिला मतदाता : 8,63,907
  • थर्ड जेंडर : 38
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