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टीएमसीपी के साथ वेबकूपा भी जुड़ गया आंदोलन में

Updated at : 10 Jul 2024 9:53 PM (IST)
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टीएमसीपी के साथ वेबकूपा भी जुड़ गया आंदोलन में

गतिरोध. काजी नजरुल विश्वविद्यालय में प्रदर्शन जारी, तीसरे दिन भी चलता रहा आंदोलन

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आसनसोल.

काजी नजरुल विश्वविद्यालय (केएनयू) में बुधवार को भी गतिरोध जारी रहा. तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के इस आंदोलन के बुधवार को तृणमूल से जुड़े वेस्ट बंगाल कॉलेज यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स एसोसिएशन (वेबकूपा) भी शामिल हो गया. वेबकूपा के जिला अध्यक्ष डॉ. वीरू रजक ने कहा कि विश्वविद्यालय को बेहतर बनाने को लेकर टीएमसीपी के इस आंदोलन के वेबकूपा भी शामिल हो गया है. पूर्व कुलपति डॉ. साधन चक्रवर्ती पर भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर वेबकूपा के आंदोलन में छात्र संगठन ने काफी सहयोग किया था. जिसके बदौलत ही 67 दिनों तक विश्वविद्यालय में आंदोलन चला और कुलपति को यहां से हटना पड़ा. इसबार भी विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों ने आंदोलन शुरू किया है, जिसके समर्थन में वेबकुपा भी उनके साथ आंदोलन में उतर गया है. बुधवार को भी कुलपति और रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय में नहीं आये. इस आंदोलन को समाप्त कराने की दिशा में किसी भी ओर से कोई पहल तीन दिनों में नहीं हुई. जिससे यह आंदोलन अब प्रतिष्ठा का विषय बनता जा रहा है. टीएमसीपी के जिला अध्यक्ष अभिनव मुखर्जी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अदालती मामलों में कितना पैसा कहां-कहां खर्च किया है, इसका स्वेतपत्र जारी करके खुलासा करना होगा. यह पैसा छात्रों का है, जिसका हिसाब छात्रों को देना होगा.

गौरतलब है कि कुलपति का इस्तीफा, लॉ की पढ़ाई तीन वर्ष करने, लॉ की सेमेस्टर फीस 20 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने, विद्यार्थियों के लिए आवंटित दुर्गापुर से बस परिसेवा को चालू करने सहित अन्य मांगों को लेकर केएनयू में गत सोमवार से टीएमसीपी ने आंदोलन शुरू किया है. पहले दिन कुलपति के कार्यालय में ताला जड़ दिया गया, जो अबतक नहीं खुला है. आंदोलन के दूसरे दिन मंगलवार को रजिस्ट्रार के कार्यालय में भी ताला जड़ दिया गया. विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्य लगभग ठप हो गया है. कुलपति और रजिस्ट्रार सोमवार से अबतक कार्यालय में नहीं आये है. उनके आने से ही टकराव काफी बढ़ने की उम्मीद है.

वेबकूपा से जुड़े विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आंदोलन में नहीं हुए शामिल

वेबकूपा से जुड़े विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बुधवार को टीएमसीपी के इस आंदोलन में शामिल नहीं हुए. चार कॉलेजों के 10 शिक्षक ही बुधवार को आंदोलन में शामिल हुए. जिसमें आसनसोल बीबी कॉलेज के तीन, रानीगंज गर्ल्स कॉलेज के दो, रानीगंज टीडीबी कॉलेज के दो और आसनसोल गर्ल्स कॉलेज के तीन शिक्षक बुधवार को आंदोलन में शामिल हुए. सभी शिक्षक सुबह 11 बजे आंदोलन स्थल पर पहुंचे और दोपहर एक बजे निकल गये. छात्र गेट के बाहर हाथों में तख्ती लिए शाम पांच बजे तक बैठे रहे. विश्वविद्यालय के शिक्षकों का इस आंदोलन में शामिल नहीं होना कई सवालों को जन्म दे रहा है.

इस आंदोलन से विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए क्या कुछ निकलेगा?

टीएमसीपी की ओर से आंदोलन जारी है. इससे क्या विश्वविद्यालय के लिए क्या कुछ बेहतर होगा? इससे पहले भी 67 दिनों तक आंदोलन करके कुलपति को यहां से हटाया गया. उनके जाने के बाद जून 2023 में नये कुलपति के आने के बाद से इन्हें भी यहां से हटाने को लेकर आंदोलन शुरू हुआ है. इससे विश्वविद्यालय को क्या लाभ होगा? इस विषय में टीएमसीपी के जिलाध्यक्ष श्री मुखर्जी ने कहा कुलपति भाजपा के एजेंट हैं और भाजपा के इशारे पर कार्य कर रहे हैं. जो छात्रों के हित में नहीं है. इनके जाने के बाद राज्य सरकार की अनुसंशा पर जो कुलपति आयेंगे वह विश्वविद्यालय और छात्रों के हित में बेहतर कार्य करेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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