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कैट ने आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में शुरू की पहल, केंद्र के सभी मंत्रालयों को भेजा पत्र

By Prabhat khabar Digital
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Bengal news : कैट के पश्चिम बंगाल चैप्टर के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल.
Bengal news : कैट के पश्चिम बंगाल चैप्टर के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल.
(फाइल फोटो).

Bengal news : आसनसोल (पश्चिम बंगाल) : कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पश्चिम बंगाल चैप्टर के अध्यक्ष सह फेडरेशन ऑफ साउथ बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल (Subhash Aggarwal) ने कहा कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक मजबूत और टिकाऊ भारतीय अर्थव्यवस्था बनाने को लेकर एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को सरकार द्वारा बढ़ावा और समर्थन देना होगा. कम ओवरहेडस होने के कारण एमएसएमई के पास घरेलू और निर्यात बढ़ाने के साथ राजस्व बढ़ाने का नेतृत्व करने की क्षमता है. कैट ने इन्ही सब मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को पत्र लिखा है.

मालूम हो कि लद्दाख के डोकलाम में 20 भारतीय जवानों की शहादत की घटना के पूर्व ही कैट ने चीनी सामानों का विरोध करते हुए पहले चरण में 3,000 सामानों को बहिष्कार करने की घोषणा की थी. डोकलाम की घटना के बाद से कैट ने इस दिशा में आगे पहल करते हुए, चीनी सामानों का विकल्प देश में कैसे तैयार हो सकता है, इसे लेकर केंद्र सरकार को चिट्ठी भेजी.

कैट के राज्य चैप्टर के चेयरपर्सन श्री अग्रवाल ने बताया कि एमएसएमई (MSME) क्षेत्र का उपयोग राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है, ताकि उद्योग को उन स्थानों पर रखा जा सके, जहां लॉजिस्टिक लागतों पर गंभीरता से विचार किये बिना पूंजी निवेश, बिजली और कराधान पर अधिकतम सरकारी सब्सिडी उपलब्ध है.

एमएसएमई (MSME) को पहले 5 वर्षों के लिए अधिकतम लाभ मिलता है, लेकिन सब्सिडी की अवधि पूरी होने के बाद उद्योगों को संघर्ष करना पड़ता है. इसके लिए एक समान प्रोत्साहन योजना पैन इंडिया होनी चाहिए. उद्योग 5 साल के लिए नकद प्रवाह समर्थन चाहता है, ताकि टर्म लोन का ब्याज और पुनर्भुगतान का में मदद मिल सके. अगर उन्हें जीएसटी (GST) की राशि के बराबर 5 साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है, तो अगले 5 वर्षों में वापस लौटाने योग्य होंगे और उद्योग भी बनाये रखेंगे.

सरकार को वित्तीय सहायता के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की सहायता, क्लस्टरों की सुविधा देकर एक ही स्थान पर इसी प्रकार के उद्योग लगाए जायें, तो लॉजिस्टिक लागत में कमी आयेगी और कौशल विकास होगा. अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाने के सरकार को कार्य करना होगा. उद्योग के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की मंजूरी की प्रक्रिया काफी जटिल है, स्थितियां भारत जैसे विकासशील देश के लिए उपयुक्त नहीं है.

चीनी सामानों के खिलाफ अब गंभीर जनभावनाएं उत्पन्न हुई है. चीन के साथ- साथ मलेशिया, हांगकांग देशों के सामानों के आयात पर ही हमें गंभीरता से सोचना होगा. राज्य और केंद्र सरकार से समर्थन और प्रोत्साहन को देखते हुए भारतीय निर्माता चीन के साथ गुणवत्ता और मूल्य में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे. श्री अग्रवाल ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर सरकार को पत्र लिखा गया है.

Posted By : Samir ranjan.

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