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नियुक्तियों के नाम पर हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा : सुप्रीम कोर्ट

Updated at : 30 Apr 2024 2:00 AM (IST)
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नियुक्तियों के नाम पर हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली. राज्य में स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षक व गैर-शिक्षक पदों पर हुई करीब 26 हजार नियुक्तियों को कलकत्ता हाइकोर्ट ने रद्द कर दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने करीब 26 हजार नियुक्तियां रद्द करने के हाइकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से किया इनकार

स्कूल नियुक्ति घोटाले में अधिकारियों की भूमिका की सीबीआइ जांच पर लगायी रोक

कोलकाता/नयी दिल्ली. राज्य में स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षक व गैर-शिक्षक पदों पर हुई करीब 26 हजार नियुक्तियों को कलकत्ता हाइकोर्ट ने रद्द कर दिया है. इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई. प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने प्राथमिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृश्या देख कर लगता है कि नियुक्ति के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है. हालांकि, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हल्की राहत दी है, लेकिन नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों की भूमिका की सीबीआइ जांच का निर्देश देने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने राज्य संचालित और राज्य सहायता प्राप्त स्कूलों में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) द्वारा की गयी 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय नियुक्तियां रद्द करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा था.

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि वह मामले पर छह मई को सुनवाई करेगी. यह देखते हुए कि लगभग 26,000 लोगों की नौकरियां छीनना एक गंभीर मामला है, शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या उपलब्ध सामग्री के आधार पर वैध और अवैध नियुक्तियों को अलग करना और यह पता लगाना संभव है कि धोखाधड़ी से नौकरी पाने के लाभार्थी कौन हैं? पीठ ने कहा कि हम उस निर्देश पर रोक लगायेंगे, जिसमें कहा गया है कि सीबीआइ राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ आगे की जांच करेगी.

कलकत्ता हाइकोर्ट ने कहा था कि सीबीआइ अवैध नियुक्तियों को समायोजित करने के लिए अतिरिक्त पद के सृजन को मंजूरी देने में शामिल राज्य सरकार के अधिकारियों की भूमिका के संबंध में आगे की जांच करेगी. उच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि आवश्यक हुआ तो सीबीआइ इसमें शामिल ऐसे लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी. आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर अपनी अपील में कहा कि उच्च न्यायालय ने नियुक्तियों को ‘मनमाने ढंग से’ रद्द कर दिया.

याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायालय पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने से पड़ने वाले प्रभाव को समझने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. याचिकाकर्ता (राज्य) को ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना शिक्षा प्रणाली को ठप कर दिया गया.

हाइकोर्ट ने पिछले सप्ताह चयन प्रक्रिया को ‘अमान्य’ घोषित कर दिया और सीबीआइ को नियुक्ति प्रक्रिया की जांच करने का निर्देश दिया. इसने केंद्रीय एजेंसी को तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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