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चाय के बागान से सियासी तूफान उठाने के फेर में BJP, ‘गोरखा टोपी’ का भी सत्ता से खास कनेक्शन

By Abhishek Kumar
Updated Date
चाय के बागान और गोरखा टोपी से सत्ता का कनेक्शन
चाय के बागान और गोरखा टोपी से सत्ता का कनेक्शन
प्रभात खबर ग्राफिक्स

Bengal Election Fifth Phase Voting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण की वोटिंग 17 अप्रैल को है. इस फेज में एससी, एसटी, ओबीसी के साथ ही आदिवासी, राजवंशी वोट बैंक काफी मायने रखता है. इस वोट बैंक को साधने की फिराक में हर पार्टी है. 10 अप्रैल को पीएम मोदी की रैली को देखें तो उन्होंने सिलीगुड़ी में चुनाव प्रचार के दौरान जिस टोपी को पहना था, उसे गोरखा टोपी बोला जाता है. अमित शाह भी एनआरसी और सीएए का जिक्र करके गोरखा को भारत से बाहर निकालने की बात गलत करार दे चुके हैं. खुद ममता बनर्जी भी इस वोट बैंक पर निशाना साधती रही हैं. इसका कारण पांचवें फेज में इनकी अहम भूमिका है.

पांचवें फेज में 17 को 45 सीटों पर वोटिंग

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में 17 अप्रैल को राज्य के छह जिलों की 45 सीटों पर मतदान होना है. इसमें उत्तरी 24 परगना की 16, दार्जिलिंग की सभी 5, नदिया की 8, पूर्वी बर्दवान की 8, जलपाईगुड़ी की 7 और कलिम्पोंग की एक विधानसभा सीट शामिल है.

चाय बागानों के आसरे सत्ता की बागडोर?

उत्तर बंगाल चुनाव और पांचवें चरण को देखें तो उत्तर बंगाल की दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कलिम्पोंग की 13 सीटों पर 17 अप्रैल को वोटिंग होनी है. चुनाव में एक-एक सीट पर जीत के इरादे से उतरी बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में उत्तर बंगाल, खासकर जलपाईगुड़ी, के लिए विशेष एलान किए. जलपाईगुड़ी के चाय बागान के मजदूरों के लिए बीजेपी ने 1,000 करोड़ देने की बात कही है. जलपाईगुड़ी में तीन सौ से ज्यादा चाय बागानों में करीब 8 लाख मजदूर काम करते हैं. चाय बागानों के मजदूरों, खासकर महिलाओं, की हालत संतोषजनक नहीं है. अरसे से चाय बागानों के मजूदरों के हालात सुधारने की बात कही गई और हुआ कुछ भी नहीं. बीजेपी का चाय बागानों के मजदूरों की सुध लेने का भरोसा देकर उनके वोट बैंक पर सीधा निशाना है.

राजवंशी वोट बैंक पर सभी की नजर

पांचवें चरण में राजवंशी वोटर्स को भी गेमचेंजर माना जा रहा है. चौथे चरण के बाद पांचवें फेज में भी राजवंशी वोटर्स को लुभाने की कोशिश है. इस फेज की वोटिंग में सभी पार्टियों की नजर जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के राजवंशी वोट बैंक पर है. अनुसूचित जाति का दर्जा हासिल कर चुके राजवंशी को अलग कूच बिहार राज्य की मांग पूरी होने का इंतजार है. इस पर किसी पार्टी ने फैसला नहीं किया है. सभी ने राजवंशी वोट बैंक की मांग पर विचार करने का भरोसा दिया है.

उत्तर बंगाल की राजनीति और पार्टियां

साल 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन ने बीजेपी को समर्थन दिया था. इसके कारण टीएमसी को उत्तर बंगाल में एक भी सीट नहीं मिली थी. बीजेपी ने सात और कांग्रेस ने एक सीट जीती थी. उत्तर बंगाल में 54 विधानसभा सीटों में से बीजेपी को 34 पर बढ़त मिली थी. टीएमसी ने 12 पर लीड पोजिशन रखा था. साल 2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 211 विधानसभा सीटें जीती. इस इलाके में टीएमसी को 26 सीटें मिली थी. साल 2011 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा 16 पर था. खास बात यह है कि 2011 में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लेफ्ट को बाहर करके बंगाल की सत्ता पर कब्जा जमाया था.

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