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कांकसा आधारसुली ग्राम में अब तक नहीं मिला आदिवासियों को आवास योजना में मकान

Updated at : 11 Nov 2024 12:59 AM (IST)
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कांकसा आधारसुली ग्राम में अब तक नहीं मिला आदिवासियों को आवास योजना में मकान

इसी गांव में चार वर्ष पहले कच्चे घर की दीवार ढहने से एक शिशु की मौत हो गयी थी.

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आवास योजना की सूची में भी धांधली का आरोप पानागढ़. पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा ब्लॉक के बनकाठी ग्राम पंचायत के आधारसुली ग्राम में अब तक आवास योजना में मकान नहीं मिलने के कारण उक्त गांव के आदिवासी समुदाय में रोष है. इस दिशा में ब्लॉक प्रशासन और स्थानीय ग्राम पंचायत भी सटीक कुछ नहीं कह पा रहे हैं. इसी गांव में चार वर्ष पहले कच्चे घर की दीवार ढहने से एक शिशु की मौत हो गयी थी. इस घटना के बाद ब्लॉक प्रशासन द्वारा मृतक परिवार समेत गांव के प्राय: गांव के 10 लोगों को आवास योजना के तहत मकान देने की बात कही गयी थी. लेकिन इस दौरान चार वर्ष बीत गये लेकिन इस दिशा में अब तक कोई कार्य नहीं हुआ. मामले को लेकर स्थानीय आदिवासियों ने रोष जताया है. स्थानीय आदिवासी महिला राधिका मुर्मू का कहना है कि चुनाव के दौरान भी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आश्वासन दिया था कि चुनाव बाद गांव के सभी परिवारों को आवास योजना के तहत पक्के मकान दिये जायेंगे. लेकिन अबतक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ. राधिका ने बताया कि करीब 100 वर्ष पुराना यह गांव है. गांव में करीब 70 कच्चे मकान हैं. 50 लोगों के घर बुरी स्थिति में हैं. गांव के ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूरी और साल पत्ता एकत्र करने का काम करते हैं. गांव के ही युवक विश्वनाथ मांडी का कहना है कि चार वर्ष पूर्व ही दीवार ढहने से एक शिशु की मौत हो गयी थी. मीडिया में खबर आने के बाद गांव में आकर प्रशासन ने आवास योजना के तहत मृत शिशु के परिवार समेत अन्य परिवारों को पक्के मकान देने की बात कही थी. लेकिन अबतक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ. मामले को लेकर बनकाठी ग्राम पंचायत के उप प्रधान सोमनाथ गांगुली का कहना है कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस दिशा में कार्य कर रही हैं. कुछ टेक्निकल समस्या हो रही है जैसे कि यह क्षेत्र गलसी विधानसभा में पड़ता है. गलसी पूर्व बर्दवान जिले में आता है. जबकि कांकसा का यह ग्राम पंचायत पश्चिम बर्दवान जिले में आता है. इसे लेकर सेंट्रल के लोग भ्रमित हो रहे हैं. लेकिन हमलोगों ने इस दिशा में समस्त कागजात और तथ्य मौजूदा अधिकारी को दे दी है. जल्द ही समस्या का हल होगा. फिलहाल गांव के ज्यादातर लोग कच्चे मकान में रह रहे हैं. करीब एक सौ लोग गांव में हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में प्रशासन और पंचायत ने कोई कदम नहीं उठाया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे. राधिका का आरोप है कि ब्लॉक के ही कई क्षेत्रों में जिनके आलीशान पक्के मकान हैं उनलोगों के नाम आवास योजना में शामिल हैं. लेकिन जरूरतमंदों का नाम तक गायब हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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