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पाक, बांग्लादेश व चीन के वेंडर्स के जरिये अमेरिकियों को भेजते थे ब्लास्ट मेल

‘आपका कंप्यूटर खतरे में है, जल्द से जल्द एंटीवायरस का नवीनीकरण करा लें, अन्यथा सारे डेटा नष्ट हो जायेंगे.’ आसनसोल में बैठ कर ब्लास्ट ई-मेल (एक साथ बहुतों को मैसेज भेजने की प्रक्रिया) करके अमेरिका के नागरिकों को यह मैसेज भेजा जाता था. मैसेज पाते ही लोग बेचैन हो जाते और अनेकों लोग मैसेज भेजनेवालों से संपर्क करने लगते थे. ये लोग प्रीमियम क्वालिटी के एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के नाम पर लोगों को फ्री का सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में इंस्टॉल करवा कर फर्जी कागजात भेज देते थे.

आसनसोल.

‘आपका कंप्यूटर खतरे में है, जल्द से जल्द एंटीवायरस का नवीनीकरण करा लें, अन्यथा सारे डेटा नष्ट हो जायेंगे.’ आसनसोल में बैठ कर ब्लास्ट ई-मेल (एक साथ बहुतों को मैसेज भेजने की प्रक्रिया) करके अमेरिका के नागरिकों को यह मैसेज भेजा जाता था. मैसेज पाते ही लोग बेचैन हो जाते और अनेकों लोग मैसेज भेजनेवालों से संपर्क करने लगते थे. ये लोग प्रीमियम क्वालिटी के एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के नाम पर लोगों को फ्री का सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में इंस्टॉल करवा कर फर्जी कागजात भेज देते थे. सीधे भुगतान के बजाय अपने अमेरिकी एजेंट शोर पिक्सेल के माध्यम से कैरिवा टेक्नॉलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के एक्सिस बैंक अकाउंट में कमीशन का पैसा आ जाता था. यह राशि फिलहाल एक से डेढ़ हजार यूएस डॉलर प्रतिमाह होती थी. इस आय को बढ़ाने के लिए कॉल सेंटर में नये युवक-युवतियों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी. काफी उम्मीदवारों का रिज्यूम छापेमारी में कॉल सेंटर से बरामद हुआ. सबसे चौकानेवाली बात पूछताछ में यह सामने आयी कि ये लोग पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के वेंडर्स के साथ मिलकर खुद को एंटीवायरस प्रतिनिधि के रूप में पेश किया और यूएस नागरिकों को ब्लास्ट ईमेल भेजा है. इसे लेकर पुलिस के जांच का दायरा काफी बड़ा हो गया है. जिसके कारण इस मामले के जांच का दायित्व साइबर क्राइम थाना आसनसोल के निरीक्षक विश्वजीत मुखर्जी को दिया गया है.

गौरतलब है कि पैसे कमाने के लालच में साइबर फ्रॉड के शातिर के साथ लोग तेजी से जुड़ रहे हैं और ठगी का यह कारोबार काफी तेजी से फैल रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त 2019 से सितंबर 2024 तक कुल 14,600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला देश के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज हुआ. जिसमें सिर्फ वर्ष 2024 में ही जनवरी से सितम्बर माह के बीच 11,333 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला दर्ज हुआ. वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है, जो देश की जीडीपी का 0.7 फीसदी होगी. साइबर अपराध का जाल इसकदर फैल रहा है कि इसमें जॉइनिंग के लिए अब इंटरव्यू की प्रक्रिया भी चालू हो गयी है. भोले भाले बेरोजगारों को साइबर अपराधी कॉल सेंटर के नाम पर अपने यहां काम पर लगाते हैं फिर उनसे गलत काम करवाते हैं. आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र के फतेहपुर इलाके में ऐसे दो कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ पहले हो चुका है. मंगलवार रात दूसरे कॉल सेंटर के भंडाफोड़ से पुलिस भी चौंकी हुई है.

आसनसोल में बैठ अमेरिकियों को लगाते थे चूना, दो माह से चल रहा था कारोबार

आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र अंतर्गत हॉटन रोड के पूर्वासा लेन में रंजन कैबिनेट के पास एक इमारत के ग्राउंड फ्लोर में कॉल सेंटर में छापेमारी के बाद पुलिस को चौकानेवाली जानकारी हाथ लगी. आसनसोल में बैठकर कुछ युवक विदेशों में विशेष कर यूएस के नागरिकों को लूट रहे थे. मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. जिसमें आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र के बुधा इलाके का निवासी अहतर अली आजम उर्फ राजेर उर्फ जॉन इवान्स (39), हीरापुर थाना क्षेत्र के बीसी कॉलेज इलाके का निवासी राजीव गुप्ता उर्फ मार्क विलियम्स (30), आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के रेलपार कुरेसी मुहल्ला इलाके का निवासी मोहम्मद मुख्तार उर्फ जेम्स (29), सैयद रिजवी उर्फ ट्रेवर स्मिथ (35), पुराना स्टेशन मिस्त्रीपाड़ा इलाके का निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ एलेन वेबर (26) और रेलपार ओके रोड इलाके का निवासी नेहाल अंसारी उर्फ स्टीव मार्टिन शामिल हैं. यह सारे फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करने में माहिर हैं और यूएस नागरिकों को एंटीवायरस बेचने के नाम पर लूटते थे. ब्लास्ट ईमेल करके लोगों को इस कदर डराते थे कि वे इनसे तुरंत एंटीवायरस खरीदने को बाध्य हो जाते थे. मामले को पुलिस ने काफी गंभीरता से लिया है. इनके सहयोगी पाकिस्तानी, बांग्लादेशी व चीनी हैं. पुलिस ने इनके खिलाफ साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस नंबर 21/25 में बीएनएस की धारा 318(4)/338/336(3)/340(2)/61(2) तथा भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 20/21 के साथ सूचना एवं प्रौधोगिकी अधिनियम की धारा 66/66सी/66डी के तहत मामला दर्ज किया है. गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को बुधवार को जिला अदालत में पेश किया गया. जांच अधिकारी ने 10 दिनों की पुलिस रिमांड की अपील की. अदालत ने सात दिनों की रिमांड मंजूर की है.

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Prabhat Khabar News Desk
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