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10 वर्ष पहले से है दो स्कूलों को अपर प्राइमरी की मान्यता, पर पढ़ाई नहीं

Updated at : 28 Jun 2025 12:01 AM (IST)
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10 वर्ष पहले से है दो स्कूलों को अपर प्राइमरी की मान्यता, पर पढ़ाई नहीं

उदासीनता. सालानपुर प्रखंड क्षेत्र में हिंदी माध्यम के बच्चों का ड्रॉप आउट चिंताजनक

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हिंदुस्तान केबल्स के स्कूलों के बंद होने से स्थिति विकट, चित्तरंजन में है एकमात्र हिंदी माध्यम हाइस्कूल

शिक्षा का अधिकार कानून-2009 का हो रहा उल्लंघन, दो किमी के दायरे में बच्चों को नहीं मिल रहा स्कूल आसनसोल/रूपनारायणपुर. जिला शिक्षा विभाग की कथित उदासीनता से सालानपुर प्रखंड क्षेत्र में हर साल भारी संख्या में हिंदीभाषी विद्यार्थियों के ड्रॉपआउट होने का सिलसिला जारी है. प्रखंड में कुल आठ प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन अपर प्राइमरी स्कूलों की कमी के कारण बच्चों को आगे की पढ़ाई करने में काफी कठिनाई हो रही है. कक्षा चार के एक बच्चे को कक्षा पांच की पढ़ाई करने के लिए दो बसें बदल कर 14 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन बच्चों के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखना कितनी बड़ी चुनौती है? सरकार के समक्ष इन बच्चों की समस्या को रखा गया और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग की अनुशंसा पर छह अगस्त 2014 को ही रूपनारायणपुर में रूपनारायणपुर अपर प्राइमरी (हिंदी) कक्षा पांच से आठ तक और 24 अगस्त 2017 में देंदुआ इलाके में देंदुआ हिंदी जूनियर हाइस्कूल (कक्षा पांच से आठ) को मान्यता दी. वर्ष 2019 में दोनों स्कूलों में तीन-तीन स्थायी शिक्षकों का पद राज्य सरकार स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आवंटित किया गया. सर्व शिक्षा मिशन के अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण स्कूल भवन नहीं बना और शिक्षकों के आवंटन के बावजूद स्कूल निरीक्षकों की उदासीनता के कारण शिक्षकों के रिक्त पद की मांग स्कूल सर्विस कमीशन को नहीं भेजा गया, जिसके कारण शिक्षक भी नहीं मिला. अतिरिक्त जिलाधिकारी (शिक्षा) संजय पाल ने कहा कि इस मुद्दे पर वे जिला स्कूल निरीक्षक से रिपोर्ट लेकर ही कुछ बता सकते हैं.

गौरतलब है कि सालानपुर प्रखंड एक औद्योगिक क्षेत्र है और सरकारी व गैर सरकारी उद्योगों की भरमार है. जिसके कारण हर राज्य के लोग यहां आकर बसे हैं. जो आर्थिक रूप से थोड़े मजबूत हैं, वे अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाते है, गरीब बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही एकमात्र सहारा है. प्रखंड में कुछ आठ प्राइमरी स्कूल है. चित्तरंजन रेल नगरी में तीन, हिंदुस्तान केबल्स इलाके में तीन, देंदुआ के रामडी में एक और डीवीसी लेफ्ट बैंक इलाके में एक स्कूल है. अपर प्रायमरी या हाइस्कूल की कमी के कारण भारी संख्या में बच्चे प्राइमरी के बाद ड्रापआउट हो जा रहे हैं.

हिंदुस्तान केबल्स की बंदी और चिरेका व डीवीसी के स्कूलों में बाहरी बच्चों का दाखिला कठिन

सालानपुर प्रखंड में स्थित हिंदुस्तान केबल्स लिमिटेड संस्था बंद होने के बाद से स्थिति खराब हुई. हिंदुस्तान केबल्स संस्था के दो स्कूल थे जहां कक्षा दस तक और 11-12 की पढ़ाई होती थी. बाहरी बच्चों का दाखिला आसानी से होता था. संस्था 2017 में बंद हो गयी. इसके बाद स्कूल भी बंद हो गया. राज्य सरकार की एकमात्र हिंदी मध्यय सरकारी हाइयर सेकेंडरी स्कूल चित्तरंजन में है. सारे प्रखंड के बच्चों के लिए एकमात्र सहारा. डीवीसी से कक्षा चार के एक बच्चे को 14 किलोमीटर यात्रा करके यहां पहुंचना पड़ेगा. चित्तरंजन रेल प्रशासन की अपनी स्कूल है लेकिन बाहरी बच्चों का दाखिला यहां कठिन है. हिंदी माध्यम शिक्षा को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे एक्टिविस्ट व साहित्यकार सृंजय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत दो किलोमीटर के दायरे में अपर प्राइमरी स्कूल के नियम का घोर उल्लंघन है. इसे लेकर मुहिम शुरू की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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