जामुड़िया में हड़ताल के समर्थन में उतरे वामपंथी, तृणमूलियों से हुई झड़प

Updated at : 09 Jul 2025 9:28 PM (IST)
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जामुड़िया में हड़ताल के समर्थन में उतरे वामपंथी, तृणमूलियों से हुई झड़प

वामपंथी ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारतव्यापी बंद का जामुड़िया में मिला-जुला असर देखने को मिला. वामपंथी कार्यकर्ताओं ने जहां बंद को सफल बनाने का पूरा प्रयास किया, वहीं तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया.

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जामुड़िया.

वामपंथी ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारतव्यापी बंद का जामुड़िया में मिला-जुला असर देखने को मिला. वामपंथी कार्यकर्ताओं ने जहां बंद को सफल बनाने का पूरा प्रयास किया, वहीं तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की भी हुई, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया.

सुबह से ही ठप रहा परिवहन, कुछ रूटों में आंशिक असर

बंद के आह्वान के कारण जामुड़िया थाना मोड़ बस स्टैंड से रानीगंज, हरिपुर, और दोमहानी रूट की मिनी बसों का परिचालन सुबह से ही ठप रहा.इससे इन रूट्स पर यात्रा करने वाले यात्रियों को खासी परेशानी हुई, हालांकि, जामुड़िया से आसनसोल रूट पर कुछ मिनी बसें चलती रहीं, जिससे यात्रियों को थोड़ी राहत मिली.

जामुड़िया बस स्टैंड के एजेंट अशोक बागदी ने बताया कि जामुड़िया से आसनसोल और जामुड़िया से दोमहानी जाने वाली बसें लगभग सामान्य रहीं, लेकिन जामुड़िया से रानीगंज जाने वाली बसों की संख्या पर थोड़ा असर पड़ा. उन्होंने बताया कि आमतौर पर जामुड़िया बस स्टैंड से प्रतिदिन लगभग 32 बसें चलती हैं, लेकिन आज यह संख्या 15 रही, जिससे यात्रियों को असुविधा हुई. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बंद का जामुड़िया बस स्टैंड पर बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़ा.

वामपंथियों ने बताया सफल, टीएमसी ने कहा विफल

वामपंथी नेता मनोज दत्त ने दावा किया कि जामुड़िया में बंद पूरी तरह से सफल रहा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 10 ट्रेड यूनियनों द्वारा यह देशव्यापी बंद बुलाया गया था. दत्त के अनुसार, जामुड़िया में छोटे कारखाने पूरी तरह से बंद रहे और बड़े कारखानों का सिर्फ एक गेट खुला रहा, जबकि परिवहन पूरी तरह से ठप रहा. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बंद को सिर्फ वामपंथी कार्यकर्ताओं ने ही नहीं, बल्कि श्रमिक, किसान, मजदूर, कारखानों में काम करने वाले श्रमिक, व्यापारी और दुकानदारों ने भी समर्थन दिया.

मनोज दत्त ने 1886 में 8 घंटे काम करने के अधिकार के लिए हुए आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि आज उसी अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए आंदोलन किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों के स्वार्थ की रक्षा करने वाले इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर काम कर रही हैं और दोनों ही जनता विरोधी हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी वामपंथी कार्यकर्ता ने किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की और लोग अपनी मर्जी से बंद के समर्थन में आगे आए.

दूसरी ओर, जामुड़िया ब्लॉक एक युवा टीएमसी अध्यक्ष मृदुल चक्रवर्ती ने इस बंद को पूरी तरह से विफल बताया.उन्होंने बताया कि एक बैंक के पास बैंक मैनेजर को बैंक में घुसने नहीं दिया जा रहा था, लेकिन टीएमसी कार्यकर्ताओं ने समझा-बुझाकर बैंक मैनेजर को प्रवेश दिलवाया.चक्रवर्ती ने दावा किया कि बाजार में भी अन्य दिनों की तरह ही सरगर्मी देखी गई और औद्योगिक इलाकों में लगभग सभी कारखाने खुले रहे, जहां उपस्थिति दर सामान्य रही.उनके अनुसार, इक्का-दुक्का वाहनों को छोड़कर बाकी सभी वाहन सड़कों पर उतरे, जिससे परिवहन पर कोई असर नहीं पड़ा.मृदुल चक्रवर्ती ने दावे के साथ कहा कि वामपंथियों के बंद का जामुड़िया में कोई असर नहीं पड़ा.

झड़प और पुलिस हस्तक्षेप

बंद के दौरान जामुड़िया बाजार में स्थित एक बैंक के पास वामपंथी और टीएमसी के लोगों में किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गयी, जो जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गयी. सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति नियंत्रित करते हुए मामले को शांत कराया. कुल मिलाकर, जामुड़िया में बंद को लेकर राजनीतिक दलों के दावों में भिन्नता देखने को मिली, लेकिन आम जनता को परिवहन संबंधी कुछ परेशानियां झेलनी पड़ीं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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