कीटनाशकों से पर्यावरण के साथ मानव जीवन को भी क्षति

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कीटनाशकों से पर्यावरण के साथ मानव जीवन को भी क्षति

अधिकारियों ने कहा कि यदि किसान इस तकनीक को अपनाएं तो उत्पादन लागत घटेगी, पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी.

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नितुरिया में किसानों को सिखायी गयी जैविक कीट नियंत्रण तकनीकें

कीटनाशक के उपयोग से मित्रकीट का भी हो रहा सफाया, जो है चिंताजनक

आसनसोल/नितुरिया. रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को देखते हुए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, कोलकाता की पहल पर नितुरिया प्रखंड के इनानपुर गांव में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया.

शिविर में किसानों को संपूर्ण कीट प्रबंधन की चार मुख्य विधियों — व्यावहारिक, यांत्रिक, जैविक और सीमित रासायनिक उपायों — की जानकारी दी गयी. उन्हें सुरक्षित मात्रा में कीटनाशक उपयोग, फेरोमोन गंध फंदा, पीले-नीले चिपचिपे फंद���, फल मक्खी नियंत्रण और जैविक फफूंद ‘ट्राइकोडर्मा’ तैयार करने की तकनीक सिखाई गई. किसानों ने खेतों में मित्र कीटों की पहचान और चूहे नियंत्रण के उपायों पर भी अभ्यास किया.

शिविर में उपनिदेशक एन. अनीता देवी, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी प्रसेनजीत हलदार, वैज्ञानिक संदीप मुखर्जी और राज्य कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे. किसानों को राष्ट्रीय कीट-पतंग निगरानी प्रणाली (NPSS) मोबाइल ऐप का प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे वे खेतों में रोग या कीट की पहचान कर तत्काल समाधान पा सकेंगे.

अधिकारियों ने कहा कि यदि किसान इस तकनीक को अपनाएं तो उत्पादन लागत घटेगी, पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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