मंत्री ज्योत्सना मांडी ने सहराई उत्सव में पेश किया पारंपरिक नृत्य

हर साल रूपरहीर और आसपास के लगभग 10 गांवों के आदिवासी लोग रास पूर्णिमा के दिन इस एक दिवसीय उत्सव का आयोजन करते हैं.
बांकुड़ा. मंत्री और रानीबांध विधायक ज्योत्सना मांडी बुधवार को खातड़ा-मुकुटमणिपुर जाने वाली सड़क पर स्थित रूपरहीर गांव के मैदान में आयोजित 91वें पारंपरिक आदिवासी सहराई उत्सव में नृत्य करती नजर आयीं. हर साल रूपरहीर और आसपास के लगभग 10 गांवों के आदिवासी लोग रास पूर्णिमा के दिन इस एक दिवसीय उत्सव का आयोजन करते हैं. जिले के अलावा पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर सहित कई क्षेत्रों से आदिवासी समुदाय के लोग इस मेले में शामिल होते हैं. मेला स्थल पर वेराइटी और खाने-पीने की दुकानों पर भीड़ देखी गयी.
सांस्कृतिक नृत्यों से सराबोर रहा मेला स्थल
शाम को धमसा-मादल की धुन पर सांस्कृतिक नृत्य प्रतियोगिताएं और कार्यक्रम शुरू हुए. विभिन्न जिलों से आये समूहों ने सहराई, दांता, लगड़े, डहर, लुहुरी सहित पारंपरिक नृत्यों में हिस्सा लिया. पूरा मेला स्थल रात भर गीत-संगीत और नृत्यों से गूंजता रहा. विजेता समूहों को पुरस्कार भी प्रदान किये गये.मंत्री भी जुड़ीं अपनी संस्कृति की जड़ों से
जब पूरे जिले के राजनीतिक नेता और कार्यकर्ता अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त थे, उसी समय मंत्री ज्योत्सना मांडी धमसा-मादल की ताल पर स्वयं नृत्य करने लगीं. एक आदिवासी बेटी के रूप में उन्होंने अपने समाज और संस्कृति से जुड़े सहराई नृत्य में सभी के साथ हिस्सा लिया. उनके नृत्य को देखने के लिए लोगों की उत्सुक भीड़ लगी रही. इस उत्सव का एक अन्य पारंपरिक पक्ष दोपहर में मुर्गों की लड़ाई से संबंधित है. पर्यावरण और पशु प्रेमी संस्था ‘माय डियर ट्रीज एंड वाइल्ड’ के अनुसार, यह आदिवासियों की एक पवित्र परंपरा है और इसलिए इसे अपने मूल स्वरूप में ही शांति और संयम के साथ निभाया जाना चाहिए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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