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बंगाल में सेना के पुराने 'बुलेटप्रूफ' हेलमेट की तस्करी? जंगल में मिले सैकड़ों हेलमेट, जांच में जुटी पुलिस

Updated at : 13 Nov 2022 2:42 PM (IST)
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बंगाल में सेना के पुराने 'बुलेटप्रूफ' हेलमेट की तस्करी? जंगल में मिले सैकड़ों हेलमेट, जांच में जुटी पुलिस

West Bengal: पानागढ़ वन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि इन पुराने हेलमेट्स को किसने जंगल में फेंका है, उसकी जानकारी उन्हें नहीं है. सूचना मिली थी कि जंगल में काफी संख्या में सेना के पुराने हेलमेट पड़े हैं. इसके बाद वन विभाग की टीम पहुंची और सभी हेलमेट को अपने कब्जे में ले लिया.

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West Bengal: पश्चिम बंगाल में वन विभाग की टीम को जंगल से सेना के सैकड़ों हेलमेट मिले हैं. पानागढ़ वन विभाग की टीम ने ये हेलमेट बरामद किये हैं. वन विभाग ने हेलमेट को जब्त कर लिया है. पानागढ़ की पुलिस भी जांच में जुट गयी है. पानागढ़ सेना छावनी की खुफिया विभाग भी तहकीकात कर रही है.

वन विभाग की टीम ने हेलमेट को किया जब्त

पानागढ़ वन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि इन पुराने हेलमेट्स को किसने जंगल में फेंका है, उसकी जानकारी उन्हें नहीं है. सूचना मिली थी कि जंगल में काफी संख्या में सेना के पुराने हेलमेट पड़े हैं. इसके बाद वन विभाग की टीम पहुंची और सभी हेलमेट को अपने कब्जे में ले लिया. आज फिर सैकड़ों हेलमेट सड़क किनारे जंगल में मिले.

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वन विभाग का कहना है की इस तरह पर्यावरण एवं वन को दूषित करना उचित नहीं है. साथ ही कहा कि ये हेलमेट अचानक यहां कैसे पहुंच गये, इसकी जांच पुलिस कर रही है. स्थानीय लोगों ने प्रभात खबर को बताया कि सभी हेलमेट पुराने हैं. ये बुलेटप्रूफ हेलमेट लगते हैं. काफी सख्त हैं. अगर उग्रवादियों के हाथ लग गये, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है.

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सड़क किनारे जंगल में किसने फेंके सेना के हेलमेट

बता दें कि पश्चिम बर्दवान जिला के कांकसा थाना अंतर्गत पानागढ़ मिनी बाजार के पास धोवारू स्थित पानागढ़-मोरग्राम सड़क किनारे जंगल में सैकड़ों पुराने हेलमेट मिलने के बाद से इलाके में कौतूहल मच गया. आखिर इतने हेलमेट यहां किसने फेंके? क्यों फेंके? हेलमेट कहां से लाये गये और किसको देने की योजना थी? यहां ये हेलमेट कैसे पहुंचे? इन सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है.

स्थानीय लोगों ने बुलेटप्रूफ हेलमेट की तस्करी की आशंका जतायी

स्थानीय लोगों ने पुराने बुलेटप्रूफ हेलमेट की तस्करी की आशंका जतायी है. यह भी आशंका जाहिर की है कि कहीं ये हेलमेट नक्सलियों को तो नहीं भेजे जा रहे थे. चेकिंग के डर से हेलमेट को यहां फेंककर चले गये. हालांकि, पुलिस और वन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गयी है.

छावनी के खुफिया विभाग ने की हेलमेट की जांच

रविवार को पानागढ़ सेना छावनी के खुफिया विभाग के लोगों ने पानागढ़ वन विभाग पहुंचकर पुराने हेलमेट की जांच की. घटनास्थल का भी जायजा लिया. इसके बाद फिर सैकड़ों पुराने हेलमेट मिलने के बाद सवाल गहरा गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जंगल में सेना के पुराने हेलमेट फेंके जाने के मकसद की जांच होनी चाहिए.

रिपोर्ट- मुकेश तिवारी, आसनसोल

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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