छोटी-छोटी खदानों के विलय की योजना पर कार्य
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सांकतोडिया : देश में कोयले की मांग को देखते हुए इसीएल ने वर्ष 2020 तक 62 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने का प्लान तैयार किया है. लक्ष्य को पूरा करने को लेकर कंपनी प्रबंधन ने कई छोटी-छोटी खदानों का ेविलय कर बड़ी खदान बनाने की योजना है. सूत्नों के अनुसार कंपनी प्रबंधन ने 40 खदानों […]
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सांकतोडिया : देश में कोयले की मांग को देखते हुए इसीएल ने वर्ष 2020 तक 62 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने का प्लान तैयार किया है. लक्ष्य को पूरा करने को लेकर कंपनी प्रबंधन ने कई छोटी-छोटी खदानों का ेविलय कर बड़ी खदान बनाने की योजना है. सूत्नों के अनुसार कंपनी प्रबंधन ने 40 खदानों के विलय की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है.
कोल इंडिया को वर्ष 2020 तक एक हजार मिलियन टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है. मौजूदा समय में कोल इंडिया की उत्पादन क्षमता 598 मिलियन टन है. छोटी छोटी खदानों के विलय से एक तरफ रोजगार बढ़ने की संभावना है तो दूसरी तरफ अवैध खदानों के आसपास रह रहे हजारों की आबादी को विस्थापन का दंश ङोलना पड़ सकता है. कोल अधिकारियों का मानना है कि चुनौतियों से निबटने के लिए सभी का सहयोग जरु री है. कोल इंडिया के तहत 413 में से 175 खुली खदाने हैं. दो सौ भूमिगत खदाने हैं.
30 खदाने ऐसी हैं जिनमे ओपन एवं भूमिगत दोनों खनन होता है. 175 खुली खदानों में से कई मेगा प्रोजेक्ट की श्रेणी की है. एक हजार मिलियन टन कोयला उत्पादन कर पावर प्लांटो तक पहुंचाना कोल इंडिया के लिए बड़ी चुनौती है. उस चुनौती को पूरा करने के लिए कोल इंडिया रेल मंत्नालय के साथ मिलकर तीन राज्यों में रेल कॉरिडोर बनाने पर काम कर रही है. झारखण्ड, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में कोयला ढुलाई के लिए रेल लाइन की साइडिंग तक विस्तार हो रहा है. इस मद में कोल इंडिया साढ़े सात हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च कर रही है.
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