नैतिकता की गिरावट रोकने के लिए ‘फिरो एसो आगुन’

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आसनसोल : समाज के नैतिक मूल्यों में लगातार गिरावट आ रही है. राष्ट्रीय स्तर पर कोई ऐसा व्यक्तित्व नहीं है, जिसे केंद्र कर समाज को प्रेरणा मिल सके. इस गिरावट को रोकने तथा मानवीय मूल्यों को फिर से स्थापित करने के लिए फिर से स्वामी विवेकानंद, विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर, विद्रोही कवि नजरूल, नेताजी सुभाष चंद […]

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आसनसोल : समाज के नैतिक मूल्यों में लगातार गिरावट आ रही है. राष्ट्रीय स्तर पर कोई ऐसा व्यक्तित्व नहीं है, जिसे केंद्र कर समाज को प्रेरणा मिल सके. इस गिरावट को रोकने तथा मानवीय मूल्यों को फिर से स्थापित करने के लिए फिर से स्वामी विवेकानंद, विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर, विद्रोही कवि नजरूल, नेताजी सुभाष चंद बोस, समाज सुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर जैसे राजा राम मोहन राय शख्सियत को पुन: इस धरती पर आना चाहिए.
स्थानीय पोलो ग्राउंड में चल रहे पुस्तक मेले में इस थीम को केंद्र कर आसनसोल शिशु भारती विद्या मंदिर उच्च बालिका विद्यालय की स्टूडेट्सों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया. ‘फिरे एसो आगुन’ के नाम से उन्होंने संगीतमय अनुष्ठान पेश किया. पुस्तक मेला मैदान के बीच में बने मंच पर इस स्कूल की 32 लड़कियों ने अपनी बेहतर प्रतिभा का परिचय दिया.
कार्यक्रम पूर्ण रूप से स्वामी विवोकानंद को समर्पित था. लड़कियों ने विभिन्न महापुरुषों का रूप ले रखा था. बारी-बारी से सभी प्रमुख महापुरुष मंच पर आ रहे थे. उनसे संबंधित कविताओं का पाठ, उनके जीवन के आदर्श व उनके विचारों को केंद्रित कर बाते रखी जा रही थी. समाज में उनकी अनिवार्यता को भी प्रमुखता से रखा गया. पूरा कार्यक्रम संगीत पर आधारित है. दर्शकों ने कलाकारों को तथा थीम की प्रशंसा की.
आयोजन में मौजूद रही स्कूल की प्रधानाध्यापिका अनीता सरकार ने कहा कि समाज में लगातार गिरावट आ रही है. नैतिक मूल्यबोध नष्ट हो रहे हैं. समाज में कोई प्रेरणा स्त्रोत नहीं है. इसलिए बंगाल की इन विभूतियों को फिर से इस धरती पर आना चाहिए तथा आग बन कर इन बुराइयों को दूर करना होगा. इसे ही थीम बनाया गया है. उनके साथ स्कूल की शिक्षिका सुदेशना सरकार, इंद्राणी चट्टोपाध्याय, सुदोपा रूद्र, शुभ्रा राय, मामोनी आदि मौजूद थी. कई शिक्षिकाओं ने इसमें अभिनय भी किया.
बेजान दिख रही हैं मैदान बीच लगी फूल प्रदर्शनी
पिछले हर पुस्तक मेला में आकर्षण का केन्द्र रही फूल प्रदर्शनी इस वर्ष पूरी तरह से बेजान है.शहर में बड़ी संख्या में फूल प्रेमी हैं तथा उसे प्रेम से अपने घरों में लगाते भी है. इस तरह के आयोजन में प्रतियोगिता भी होती है. वे इसमें भाग लेते हैं. लेकिन इस बार सिर्फ औपचारिकताएं ही पूरी की गयी हैं. मेले में आये अधिसंख्य पुस्तक प्रेमियों ने इस पर निराशा जतायी. इसे पुस्तक मेला कमेटी भी स्वीकार करती है. कमेटी सदस्यों ने कहा कि हर बार फूल प्रदर्शनी के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी. इस कारण बड़ी संख्या में प्रतियोगी भाग लेते थे. इसके कारण अधिक किस्म व अधिक आकर्षण लिए फूल जमा हो जाते थे.
लेकिन इस बार प्रतियोगिता नहीं हो सकी. मौसम खराब होने के कारण फूल अधिक नहीं खिले. इस कारण अधिसंख्य प्रतियोगियों ने भाग लेने से इंकार कर दिया. हर बार की परंपरा को जारी रखते हुए किसी तरह फूल प्रदर्शनी की व्यवस्था की गयी है. इसमें कमेटी से जुड़े मौलिनाथ गोस्वामी, शुभ्रा सरकार, मलय सरकार व डॉ नूर रंजन गुहा ने सहयोग किया. डालिया, चंद्रमौलिक, ग्लोडियम, सूर्यमुखी, मऊजरी, सोनपारूल आदि फूल रखे गये हैं.
नये प्रकाशक, नयी पुस्तकों की कमी खल रही
मंगलवार को पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में युवक-युवतियों की भीड़ उमड़ी. पहली बार इनमें अड्डाबाजी का माहौल दिखा. लेकिन पूर्व नियोजित नहीं होने के कारण माहौल नहीं बन रहा था. बैंड के साथ युवक-युवतियों की टोली सामूहिक गान करती दिखी. थोड़ी मस्ती, थोड़ी बेफ्रिकी का माहौल आनंद दे रहा था. बड़ी संख्या में वे अलग-अलग टोली बना कर गप्पबाजी में व्यस्त रहे.
अपूर्व कौर, प्रीति राज मंडल, पल्लवी राय, अर्पिता सोम, सुकुमार गुहा, ज्योति बाग आदिद ने कहा कि वे मेला घूमने आये थे. लेकिन उन्हें काफी निराशा हाथ लगी. लेकिन मित्र-दोस्तों के मिल जाने के कारण माहौल खुशमय हो गया. उन्होंने कहा कि सभी कैरियर की तैयारी में लगे हैं.
उन्हें आशा थी कि नये प्रकाशकों के स्टॉल में कुछ नयी पुस्तकें मिल जायेंगी, लेकिन न तो कोई नया स्टॉल दिखा और न कैरियर से जुड़ी नयी पुस्तकें. सबकुछ स्थानीय सा है. प्रतियोगिता व पेशे से जुड़ी पुस्तकों की संख्या भी काफी कम है. उन्होंने कहा कि आइडिया सीम, जिम, विभिन्न स्कूलों के स्टॉल लगे हैं. इनकी प्रासंगिकता आयोजक अधिक समझते हैं. उन्होंने कहा कि इस्कॉन का स्टॉल पहली बार लगा है.
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