ननि इलाके में तृणमूल के 137 कार्यालय
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अतिक्रमण. सौंदर्यीकरण के नाम पर प्रशासन चला रहा है नियमित अभियान आसनसोल : आसनसोल नगर निगम इलाके में सत्ताशीन तृणमूल कांग्रेस व उसके जन संगठनों के नाम पर 137 कार्यालय संचालित हैं. इनमें से अधिसंख्य सरकारी जमीन पर है. मजे की बात यह है कि इनमें से एक भी पार्टी नेतृत्व के स्तर से मंजूर […]
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अतिक्रमण. सौंदर्यीकरण के नाम पर प्रशासन चला रहा है नियमित अभियान
आसनसोल : आसनसोल नगर निगम इलाके में सत्ताशीन तृणमूल कांग्रेस व उसके जन संगठनों के नाम पर 137 कार्यालय संचालित हैं. इनमें से अधिसंख्य सरकारी जमीन पर है.
मजे की बात यह है कि इनमें से एक भी पार्टी नेतृत्व के स्तर से मंजूर नहीं है. आसनसोल शिल्पांचल जिलाध्यक्ष वी शिवदासन उर्फ दासू ने कहा कि पार्टी का जिला कार्यालय पूरी तरह से सक्रिय नहीं है. उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना बने सभी कार्यालय अवैध है. उनके दायित्व लेने के बाद बिना अनुमति के कार्यालय खोलने पर पार्टी के स्तर से क ड़ी कार्रवाई की जायेगी.
सौंदर्यीकरण के लिए हट रहा अतिक्रमण
आसनसोल नगर निगम प्रशासन ने अपने अधीनस्थ शहरों यथा – आसनसोल, बर्नपुर, बराकर, नियामतपुर, कुल्टी व रानीगंज आदि का सौंदर्यीकरण करने का निर्णय लिया है. इसके लिए शहर के महत्वपूर्ण स्थलों व मुख्य सड़कों से अतिक्रमण हटाया जा रहा है.
रविवार को ही पुलिस लाइन में महकमा प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओं अभियान चलाया. इसी अभियान के तहत दशकों से जीटी रोड के किनारे लगनेवाले फल, मछली व सब्जी के थोक बाजार को कालीपहाड़ी स्थानान्तरित करने की योजना पर कार्य चल रहा है. इसके बाद भी सरकारी जमीन पर सर्वाधिक अतिक्रमण बोर्ड का संचालन करनेवाली पार्टी व उसके जन संगठनों के स्तर से कार्यालयों के नाम पर है.
नागरिकों की लगातार बढ़ रही चिंता
इधर नागरिकों का कहना है कि सौंदर्यीकरण के लिए समान नीति अपनायी जानी चाहिए. सार्वजनिक स्थलों में हुए अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आते जायेंगे, ऐसे पार्टी कार्यालयों की संख्या बढ़ती जायेगी.
किया निर्माण, लगाये झंडे, हो गया ऑफिस
निजी संस्था के सहयोग से सव्रे में यह बात सामने आयी कि नगर निगम क्षेत्र अधीनस्थ विभिन्न शहरों में तृणमूल व तृणमूल के जन संगठनों के नाम पर 137 कार्यालय संचालित हैं. इनका संचालन विभिन्न नेताओं के स्तर से होता है. इन कार्यालयों को सांगठनिक स्तर पर कोई मान्यता नहीं है. गुटबाजी के कारण सभी अपनी-अपनी सुविधा से कार्यालय बना लेते हैं.
इसके लिए अधिसंख्य कर्मी या नेता सरकारी जमीन व सरकारी भवनों का उपयोग करते हैं. अवैध निर्माण कर पार्टी का झंड़ा लगाते ही वह कार्यालय बन जाता है. इस दौरान नागरिक सुविधा-असुविधा को भी ध्यान में नहीं रखा जाता है. स्थिति यह है कि बराकर बस स्टैंड में यात्री प्रतीक्षालय को ही घेर कर कार्यालय बना दिया गया है.
जिलाध्यक्ष वी शिवदासन भी है इससे अवगत
आसनसोल शिल्पांचल तृणमूल जिलाध्यक्ष श्री दासू ने कहा कि वे इस समस्या से अवगत हैं. लेकिन उनके पास कार्यालयों की सही संख्या की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्टी हाइ कमान का साफ निर्देश है.
बीते 29 दिसंबर को दुर्गापुर में पार्टी के जिला पर्यवेक्षक सह मंत्री अरुप विश्वास की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुयी थी. उन्होंने भी स्पष्ट कहा था कि बिना जिलाध्यक्ष की अनुमति के, चाहे वह पार्टी हो या उसके जन संगठन, कोई भी कार्यालय नहीं खोला जायेगा. उन्होंने स्वीकार किया कि अपनी-अपनी सुविधा से पार्टी नेता कार्यालयों का संचालन कर रहे हैं. पार्टी के पास अधिकृत कार्यालयों की सूची नहीं है.
उन्होंने कहा कि उनके जिलाध्यक्ष बनने के बाद इस पर रोक लगी है. उन्होंने कहा कि पहले से बने कार्यालयों के बारे में वे कोई कार्रवाई नहीं करेंगे. लेकिन यदि शिकायत मिली कि इन कार्यालयों में राजनीतिक गतिविधियां न होकर इनका उपयोग क्लब की तरह हो रहा है तो पार्टी स्तर से कार्रवाई की जायेगी. किसी भी स्तर के नेता को पार्टी हाइ कमान व जिला पार्टी पर्यवेक्षक को बिना अनुमति कार्यालय खोलने नहीं दिया जायेगा.
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