चाय बागान नहीं चला सकते तो छोड़ दें
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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श्रमिकों की मौत का मामला. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के चाय उद्यमियों को दी चेतावनी, कहा चाय बागानों को राज्य सरकार चलायेगी सीएम ने बागान मालिकों पर श्रमिकों की अनदेखी का आरोप लगाया अलीपुरद्वार : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चाय बागानों के मालिकों को कड़ा संदेश दिया. बागान मालिकों को चेतावनी देते […]
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श्रमिकों की मौत का मामला. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के चाय उद्यमियों को दी चेतावनी, कहा
चाय बागानों को राज्य सरकार चलायेगी
सीएम ने बागान मालिकों पर श्रमिकों की अनदेखी का आरोप लगाया
अलीपुरद्वार : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चाय बागानों के मालिकों को कड़ा संदेश दिया. बागान मालिकों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे बागान नहीं चला पा रहे हैं तो इसे छोड़ दें.
सरकार खुद श्रमिकों के हित में बागान चलायेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय बागान के मालिक श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं. पीएफ, ग्रेच्युटी से लेकर अन्य परिसेवा देने में भी आनाकानी कर रहे हैं. ममता जिले के परेड ग्राउंड मैदान में आयोजित एक सरकारी सभा को संबोधित कर रही थीं.
उधर, डुआर्स के डंकन्स ग्रुप के बागराकोट चाय बागान में एक के बाद एक श्रमिक की मौत से बागान के श्रमिकों की अवस्था बेहाल हो गयी है. राज्य सरकार ने डंकन्स ग्रुप के मालिक गौरी प्रसाद गोयनका को सीआइडी के माध्यम से भवानी भवन में बुलाया है. आखिरकार बागराकोट चाय बगान की परिस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने अपना रुख साफ कर दिया है.
डंकन्स समूह के नागेश्वरी तथा किलकट चाय बागानों की स्थिति भी बागराकोट जैसी ही है़ हालांकि नागेश्वरी चाय बागान के श्रमिक बागान में काम कर रहे है़ं यह लोग चाय पत्ती तोड़ कर बेच देते है़
इससे कुछ न कुछ आय हो जाती है़ किलकिट चाय बागान में स्थित चाय फैक्टरी करीब एक साल से बंद है़ यहां से चाय पत्ती तोड़ कर नागेश्वरी चाय बागान फैक्ट्री को भेजा जाता है़ किलकिट चाय बागान के श्रमिकों ने बंद पड़ी चाय फैक्टरी को शीघ्र खोलने की मांग की है़ बागान मालिकों के खिलाफ सीआइडी जांच का श्रमिकों ने स्वागत किया है़
इन लोगों का कहना है कि चाय पत्ती के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है़ ऐसे में बागान मालिकों को कैसे घाटा होता है, इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए़ नागेश्वरी चाय बागान में गोपाल लाइन की रहने वाली उर्मिला महली पैसे के अभाव में अपनी चिकित्सा नहीं करा पा रही हैं.
उनकी बेटी प्रिया महली का कहना है कि पैसे के अभाव में वह अपनी मां को इलाज के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज नहीं ले जा पा रही है. वह बगैर चिकित्सा के घर में पड़ी हुई है़ दोकान लाइन का रहने वाला सुधाई बड़ाइक भी बीमार है और बगैर इलाज के मौत का दिन गिन रहा है़ चाय बागान के अन्य श्रमिकों की भी करीब-करीब ऐसी ही स्थिति है़
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