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जैक के नेतृत्व में सभी यूनियनों ने एकजुट होकर प्रबंधन के खिलाफ खोला मोर्चा यूनियनों का दावा- पहले भी प्रबंधन ने की थी साजिश, जांच में मिला था स्टॉक प्रबंधन, यूनियन प्रतिनिधियों का संयुक्त कोलियरी निरीक्षण किया जायेगा आज सांकतोड़िया : सोदपुर एरिया की माउथडीह कोलियरी को बंद करने के निर्णय के खिलाफ गुरूवार को […]

जैक के नेतृत्व में सभी यूनियनों ने एकजुट होकर प्रबंधन के खिलाफ खोला मोर्चा

यूनियनों का दावा- पहले भी प्रबंधन ने की थी साजिश, जांच में मिला था स्टॉक

प्रबंधन, यूनियन प्रतिनिधियों का संयुक्त कोलियरी निरीक्षण किया जायेगा आज

सांकतोड़िया : सोदपुर एरिया की माउथडीह कोलियरी को बंद करने के निर्णय के खिलाफ गुरूवार को ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जैक) के बैनर तले मजदूरों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की. ट्रेड यूनियन नेताओं ने अपने-अपने सदस्यों को माला पहनाकर बैठाया .

ज्ञात हो कि माउथडीह कोलियरी में कोयले का स्टॉक समाप्त हो जाने के आधार पर प्रबंधन ने इसे बंद करने का नोटिस दिया है. सोदपुर एरिया वैसे ही पूरे कोल इंडिया में सबसे घाटे वाला क्षेत्र है. इससे सलाना छह सौ करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हो रहा है. प्रबंधन ने इस एरिया को बहुत पहले ही बंद करने का निर्णय ले लिया होता, परन्तु श्रम संगठनों के पुरजोर विरोध के कारण प्रबंधन ने अपने कदम हटा लिया.

केकेएससी केंद्रीय कमिटी के सदस्य रतन मशीह ने कहा कि माउथडीह कोलियरी को बंद करने के लिए तीन वर्ष ही सोदपुर एरिया प्रबंधन ने नोटिश लगा दिया था. उस समय भी सभी यूनियनों ने सामूहिक विरोध किया था. यूनियनों ने एक स्वर में कहा था कि एक्सपर्ट से कोयले की उपलब्धता की जांच कराई जाये.

अगर कोयला नहीं रहेगा तो खदान बंद किया जा सकता है. एक्सपर्ट ने कोयले की उपलब्धता की जांच की तो पता चला कि इसमें खनन योग्य कोयला दस लाख टन है. फिर तीन वर्ष तक कोयले का उत्पादन होता रहा. अब एक बार फिर से इसे बंद करने का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने कहा कि अभी भी 20 नंबर पैनल में डेढ़ लाख टन कोयला है. अगर कोयला नहीं रहता तो सोदपुर एरिया प्रबंधन ने कंपनी मुख्यालय में उसके खनन के लिए अनुमति के लिए फ़ाइल क्यों भेजी? उन्होंने कहा कि अभी भी इसमें इतना कोयला रिजर्व है कि पांच वर्ष और कोलियरी चालू रह सकती है. प्रबंधन जान – बूझ कर इसे बंद करना चाहता है. उन्होंने कहा कि ज्वाइंट एक्शन कमेटी ईसीएल प्रबंधन से कोयले की उपलब्धता की जांच कराए जाने की मांग की है.

सोदपुर एरिया के महाप्रबंधक एस कुंडू ने कहा कि कोलियरी को तीन वर्ष पहले ही बंद करने का आदेश मिला था परन्तु किसी तरह से तीन वर्ष खींचकर चलाया गया. एक पैनल के लिए मुख्यालय में मंजूरी के लिए फ़ाइल भेजी गई थी. परन्तु मुख्यालय ने इसे खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रति टन 25 हजार रुपये का घाटा हो रहा है. सोदपुर एरिया में सबसे ज्यादा घाटा देने वाली माउथडीह कोलियरी है. सभी कर्मी पुराने हैं जिसके कारण प्रत्येक कर्मी को प्रतिदिन 5100 सौ रूपये से ज्यादा का भुगतान करना पड़ता है. जिस पैनल चलाने के लिए कहा जा रहा है उसे तैयार करने में सात महीना लग जायेगा.

बालू भराई करना होगी, इतना बालू कहां से आयेगा? सात महीना सभी वर्करों को बैठाकर वेतन देना संभव नहीं है. उन्होंने कहा की एरिया जेसीसी के साथ भी 29 अगस्त को बैठक की गई और माउथडीह कोलियरी पर ही चर्चा हुई. श्रम संगठनों के साथ शुक्रवार को खदान का निरीक्षण होगा. इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जायेगी. एरिया के और पांच खदाने बंद करनी है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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