सांकतोड़िया : 25 वर्ष पुराने आवासों को तोड़ने का निर्देश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Dec 2018 2:55 AM
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ऑडिट कमेटी की अनुशंसा पर सीआइएल ने जारी किया निर्देश कंपनी प्रबंधन जुटा मंथन में, यूनियन प्रतिनिधियों ने किया विरोध सीआइएल सहित कंपनियों पर पड़ेगा आर्थिक बोझ सांकतोड़िया : कोयलाकर्मियों के 25 साल पुराने आवासों को तोड़ कर नया बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. कोल इंडिया ने सभी अनुषांगिक कोयला कंपनियों को ऑडिट […]
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- ऑडिट कमेटी की अनुशंसा पर सीआइएल ने जारी किया निर्देश
- कंपनी प्रबंधन जुटा मंथन में, यूनियन प्रतिनिधियों ने किया विरोध
- सीआइएल सहित कंपनियों पर पड़ेगा आर्थिक बोझ
सांकतोड़िया : कोयलाकर्मियों के 25 साल पुराने आवासों को तोड़ कर नया बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. कोल इंडिया ने सभी अनुषांगिक कोयला कंपनियों को ऑडिट कमेटी की अनुशंसा पर सर्कुलर जारी कर विभागीय आवासों को तोड़ने पर विचार करने के लिए कहा है. नये बननेवाले आवास में एक रूम वातानुकूलित (एसी) होने का उल्लेख है.
ईसीएल सूत्रों ने बताया कि सीआइएल के महाप्रबंधक (वेलफेयर) के हस्ताक्षर से यह जारी किया गया है. इसमें ऑडिट कमेटी की सिफारिश का हवाला दिया गया है. इनमें उन आवासों को शामिल किया गया है जो 25 वर्ष पुराने हैं.
यह स्पष्ट नहीं है कि इन आवासों को कब तक तोड़ा जाना है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि आवास तोड़ते समय इनमें रह रहे कर्मियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी? अधिकारी व कर्मचारियों को मिलाकर एक लाख से अधिक आवास हैं. इनमें से अधिकांश 25 वर्ष पुराने हैं. इधर यूनियन प्रतिनिधि भी इसे समक्ष नहीं पा रहे हैं.
उनका कहना है कि इससे कंपनी को भारी आर्थिक क्षति होगी. कोल इंडिया वेलफेयर बोर्ड के सदस्य तथा कोलियरी मजदूर कांग्रेस (एचएमएस) महासचिव शिवकांत पांडेय ने कहा कि कोलकर्मियों के आवासों को कायाकल्प (डिसेंट हाउस) करने के नाम पर करोड़ों खर्च कर दिये गये.
कार्य पूरा नहीं हो सका. खान श्रमिक कांग्रेस (बीएमएस) के महामंत्री धनंजय पांडेय ने कहा कि डिसेंट हाउस योजना पूरी हुई नहीं तथा नया आदेश आ गया. यह पैसे की बर्बादी है. ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ कोल एग्जीक्यूटिव (एआइएसीई) के संयोजक पीके सिंह राठौर ने कहा कि यह आदेश सीआइएल के हित में नहीं है.
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